सीमा विवाद पर भारत ने चीन को साफ-साफ कहा – सीमा पर तुरंत शांति बहाली करे चीन, पाकिस्तान को भी दिखाया आईना

दिल्ली, एमएम : भारत और चीन के बीच एलएसी पर सीमा विवाद थम नहीं रहा है। कल चीन ने करीब 20 हजार सैनिक का दो दस्ता भारत सीमा पर तैनाती के आदेश दिए थे। जबाब में भारत ने भी सैन्य गतिविधियों को बढ़ा दिया। साथ ही सीमा पर कुछ लड़ाकू विमान भी तैनात कर दिए हैं। हालांकि तीसरे दौर के कोर्प स्तर की बात चित का कोई ठोस पहल होते नहीं दिखाई दे रहा है। आज रक्षामंत्री को कोर्प स्तर के मीटिंग में हुई बात चित को लेकर ब्रीफ किया गया। उसके बाद गुरुवार को भारत-चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर जारी तनाव पर सरकार ने कहा कि चीन तुरंत शांति की बहाली करे। विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘हम चीनी पक्ष से सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और अमन की बहाली अविलंब सुनिश्चित करने और गंभीरता से इसका अनुसरण करने की उम्मीद करते हैं।’

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, ‘भारत और चीन के वरिष्ठ कमांडरों की ताजा बैठक में हुई चर्चा वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास तनाव कम करने के दोनों पक्षों की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।’

पिछले दिनों सरकार द्वारा बैन की गईं टिकटॉक समेत 59 चीनी ऐप्स पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि भारत में संबंधित मंत्रालयों और विभागों द्वारा जारी किए गए हमारे नियमों और विनियमों का पालन करना पड़ता है। यह डाटा  सुरक्षा और व्यक्तिगत डाटा की गोपनीयता से संबंधित हैं।

उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कराची में पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज पर हुए हमले का भी जिक्र किया। अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, ‘कराची में हुए आतंकवादी हमले को लेकर की गई बेतुकी टिप्पणियों को भारत खारिज करता है। पाकिस्तान अपनी घरेलू समस्याओं के लिए भारत पर दोषारोपण नहीं कर सकता।’

बतादें कि कराची में हाल में हुए आतंकी हमले की निंदा करने वाले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बयान को अमेरिका और जर्मनी ने दो बार रोका था क्योंकि वे पाकिस्तान द्वारा इस घटना के लिए भारत को दोष देने तथा प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा ओसामा बिन लादेन को ‘शहीद’ बताने के कारण पाकिस्तान को ‘संदेश’ देना चाहते थे।

पाकिस्तान के कराची में 29 जून 2020 को हुए आतंकी हमले की निंदा करने वाला बयान 15 सदस्यीय संरा सुरक्षा परिषद ने बुधवार (1 जुलाई) को जारी किया था। इस बयान का मसौदा पाकिस्तान के सहयोगी चीन ने तैयार किया था और इसे मौन प्रक्रिया के तहत लाया गया था जिसमें यदि कोई सदस्य तय समयावधि के भीतर आपत्ति नहीं जताता है तो प्रस्ताव को स्वीकार्य मान लिया जाता है।

सूत्रों के मुताबिक यह विलंब पाकिस्तान को यह ”संदेश” देने के लिए किया गया कि यह संभव नहीं है कि एक ओर वह अलकायदा के पूर्व प्रमुख और भयावह आतंकवादी हमलों को अंजाम देने वाले आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को ”शहीद” कहे और कराची हमले में भारत का नाम घसीटें, वहीं दूसरी ओर अपने यहां हुए हमले के लिए स्पष्ट निंदा की उम्मीद करे।

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