जीसी मुर्मू के इस्तीफे को राष्ट्रपति ने किया मंजूर, मनोज सिन्हा होंगे जम्मू-कश्मीर के नए उप राज्यपाल

जम्मू/दिल्ली, एमएम : बुधवार शाम को जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल जीसी मूर्मू ने अचानक इस्तीफा दे दिया। मुर्मू ने ऐसे वक्त में इस्तीफा दिया है, जब जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के एक साल पूरे हुए। अब जम्मू-कश्मीर के नए उप राज्यपाल (एलजी) पूर्व केंद्रीय मंत्री और उत्तरप्रदेश भाजपा के बड़े नेता मनोज सिन्हा को बनाया गया है। समाचार एजेंसी एएनआई ने जानकारी दी है कि जीसी मूर्मू के इस्तीफे को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने स्वीकार कर लिया है और उन्होंने मनोज सिन्हा को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का नया उप राज्यपाल नियुक्त किया है।

दरअसल मामला यह है कि बुधवार शाम को गिरीश चंद्र मुर्मू ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। मुर्मू ने ऐसे वक्त में इस्तीफा दिया है, जब जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के एक साल पूरे हुए। बता दें कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के साथ राज्य को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के रूप में दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटा गया था। मुर्मू ने 31 अक्तूबर 2019 को उप राज्यपाल पद की शपथ ली थी। मुर्मू के शासनकाल में कश्मीर शांति, स्थिरता और विकास की ओर तेजी से बढ़ा है। राज्य में आतंकवाद या पत्थरबाजी की घटनाओं में भारी कमी भी आई है।

मुर्मू 1985 बैच के गुजरात कैडर के आईएएस अफसर रहे हैं। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भरोसेमंद अफसरों में माने जाते हैं। गुजरात में मोदी के मुख्यमंत्री रहने के दौरान वह उनके प्रमुख सचिव थे। एक मार्च 2019 से वह वित्त मंत्रालय में व्यय सचिव की जिम्मेदारी देख रहे थे। उन्होंने जम्मू कश्मीर के आखिरी राज्यपाल सत्यपाल मलिक के बाद उप-राज्यपाल की जगह ली थी। 1985 बैच के गुजरात कैडर के आईएएस ऑफिसर जीसी मुर्मू उस वक्त प्रिसिंपल सेक्रेटरी थे जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे।

दरअसल जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल रहते हुए गिरीश चंद्र मुर्मू केंद्र की मंशा के अनुरूप राजनीतिक संदेश नहीं दे पा रहे थे। कई मामलों में इस केंद्र शासित प्रदेश की टॉप ब्यूरोक्रेसी और पूर्व ब्यूरोक्रेट उप राज्यपाल मुर्मू के बीच सहमति नहीं बन पा रही थी। अनुच्छेद-370 समाप्त होने के एक साल बाद जिस तरह का संदेश जाना चाहिए था उसके विपरीत मुर्मू के बयान विवादों की वजह बने।

सूत्रों का कहना है कि अनुच्छेद-370 के एक साल बाद राज्य में अब राजनीतिक कवायद की भी जरूरत है। जिस तरह से कुप्रचार का एजेंडा सीमापार से चल रहा है, उसका राजनीतिक जवाब यहां की जमीन से दी जानी चाहिए थी। मनोज सिन्हा को इसी रणनीति के तहत उप राज्यपाल बनाया गया है। सूत्रों की माने तो जम्मू-कश्मीर को राजनीतिक व्यक्तित्व की जरूरत है, जिससे लोगों में भरोसा पैदा करने की राजनीतिक कवायद भी तेज हो। देर सबेर यहां के अलग-अलग समूहों से संवाद भी करना होगा।

गौरतलब है कि मुर्मू 4 जी और राज्य में चुनाव पर दिए गए बयानों की वजह से विवाद में आए थे। मुर्मू ने 370 समाप्त होने के एक साल पूरे होने के मौके पर बुधवार को अपने सभी मेल मुलाकात के कार्यक्रम रद्द कर दिए थे और वे जम्मू चले गए थे।

रेल राज्य मंत्री रह चुके हैं मनोज सिन्हा 

वहीं, मनोज सिन्हा उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से संसद सदस्य रहे हैं। वर्ष 1989-96 के बीच में वे राष्ट्रीय परिषद के सदस्य थे। वर्ष 1996 में मनोज सिन्हा 11वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए तथा वर्ष 1999 में उन्हें फिर से 13वीं लोकसभा के लिए पुनः निर्वाचित हुए। 1999 से 2000 के बीच वह योजना तथा वास्तुशिल्प विद्यापीठ की महापरिषद के सदस्य रहे तथा शासकीय आश्वासन समिति तथा ऊर्जा समिति के सदस्य भी रहे। वर्ष 2014 में वे 16वीं लोकसभा के लिए उत्तर प्रदेश के गाजीपुर निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित हुए थे। वह रेल राज्य मंत्री रहे हैं और बाद में उन्हें संचार मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार भी सौंपा गया था।

ताजा जानकारी के मुताबिक मनोज सिन्हा दिल्ली से जम्मू के लिए रवाना भी हो चुके हैं। वहीं जीसी मुर्मू जम्मूकश्मीर से दिल्ली के लिए निकल चुके हैं। देखने की बात ये होगी की अब उन्हें कौन सी जिम्मेदारी दी जाएगी।

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