मधुबनी के जिलाधिकारी डॉ नीलेश देवरे की अनोखी पहल, श्रीविधि तकनीक से किया धान रोपनी

मधुबनी, एमएम : भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहाँ की करीब 70 प्रतिशत आबादी किसानी से जुड़े हैं। भारत की कुल जीडीपी में किसानों का बहुत योगदान है। भारत की आर्थिक रीढ़ कहें जाने वाले हमारे किसानों की हालात कुछ अच्छा नहीं कहा जा सकता। भारत में सिर्फ कहा जाता है कि किसान भगवान होते हैं। वे अन्नदाता हैं। ये बातें कहने-सुनने में बहुत अच्छी लगती हैं। लेकिन, जब खेत में काम करने या फिर आगे बढ़कर किसानों की मदद करने की बात हो तो बहुत कम ही सामने आ पाते हैं। या यूँ कहें कि किसानों की बात तो सब करते हैं लेकिन उनकी स्थिति का आंकलन सही से कोई नहीं करता।

कुछ गिने-चुने लोगों बिहार के किसानों के हितैषी रहें हैं। वर्त्तमान में बिहार के किसानों की स्थिति अच्छी नहीं है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है हर साल आने वाली बाढ़। एक समय था जब बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र को किसानी करते लोगों ने देखा था। भोगेन्द्र झा भी किसानों के बारे में सोचते थे। चतुरानन मिश्र भी किसानों के लिए आवाज उठाए। लेकिन किसानों की स्थिति में कुछ खास बदलाव नहीं हुआ।

हालाँकि अब कुछ जिलाधिकारी लोग सामने आ रहे हैं। एक ऐसा ही नायब नमूना पेश किया है मिथिला प्रक्षेत्र के मधुबनी जिले के जिलाधिकारी डॉ. नीलेश रामचंद्र देवरे ने। डॉ देवरे रविवार को श्री विधि तकनीक को बढ़ावा देने के लिए खुद धान की रोपाई शुरू कर दी। डीएम डॉ. निलेश रामचंद्र देवरे रविवार को पंडौल कृषि फॉर्म पर पहुंचे। यहां श्रीविधि तकनीक की जानकारी लेने के बाद इसको प्रमोट करने के लिए उन्होंने धान की रोपाई की। जिलाधिकारी के इस पहल की पूरे प्रदेश में चर्चा हो रही है। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने खुद इस पर पोस्ट किया है।

हालांकि बतादें कि खेत में उतरने वाले मधुबनी के डीएम अकेले नहीं हैं। इससे पहले सीतामढ़ी की जिला पदाधिकारी अभिलाषा कुमारी शर्मा भी खेती की कमान संभाल चुकी हैं। वे खुद धान के खेत में पहुंच धान की फसल की कटाई की थी। उनके साथ कई अधिकारी भी उस समय थे। खेतों में उन्हें देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ जुट गई थी। डीएम अभिलाषा कुमार की इस पहल को लोगों ने काफी सराहा था।

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