नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी को केंद्रीय कैबिनेट से मिली मंजूरी, एसएससी,रेलवे और बैंकिंग के लिए होगा कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट

दिल्ली, एमएम : केंद्र की मोदी सरकार ने बुधवार को एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। सालों से छात्रों की चली आ रही मांग को अब जाकर पूरा किया गया है। केंद्रीय केबिनेट ने राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी की स्थापना के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह नौकरी ढूंढ रहे युवाओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी केंद्र कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) का आयोजन करेगी। यह कंप्टूयर बेस्ड ऑनलाइन परीक्षा होगी।

इससे सरकारी नौकरी के चयन के लिए विभिन्न परीक्षाओं में बैठने वाले अभ्यार्थियों को अब एक ही परीक्षा में बैठना होगा। सरकार के सचिव सी चंद्रमौली ने कहा कि केंद्र सरकार में लगभग 20 से अधिक भर्ती एजेंसियां ​​हैं। उन्होंने कहा कि अभी एसएससी, आईबीपीएस और आरआरबी एजेंसी केवल को इसके दायरे में लाया गया है, बाद में इसमें अन्य भर्ती एजेंसियों को भी शामिल किया जाएगा। इस एजेंसी का उद्देश्य उम्मीदवारों को अलग-अलग परीक्षाओं के जाल से छुटकारा दिलाना और भर्ती प्रक्रिया को आसान बनाना है। सीईटी मेरिट लिस्ट तीन साल के लिए मान्य रहेगी। इस बीच उम्मीदवार अपने स्कोर में सुधार के लिए आगामी परीक्षा में भी बैठ सकेगा।

बतादें कि एनआरए एक स्वायत्त संस्थान होगी, जिसका मुख्यालय दिल्ली में होगा। इस भर्ती एजेन्सी का गठन सोसायटी अधिनियम के तहत किया गया है। इसका अध्यक्ष सचिव स्तर का अधिकारी होगा। एनआरए द्वारा देश भर में एक हजार परीक्षा केंद्रों की स्थापना की जाएगी। एक जिले में कम से कम एक परीक्षा केंद्र का होना सुनिश्चित किया जाएगा। प्रारंभिक परीक्षा 12 क्षेत्रीय भाषाओं में आयोजित की जाएगी। एनआरए के गठन पर तीन सालों में करीब 1517 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। मकसद साफ है कि पारंभिक परीक्षा के लिए उम्मीदवार को जिला मुख्यालय से आगे नहीं जाना पड़ेगा।

केन्द्रीय कार्मिक और पेंशन मामलों के मंत्री डॉ जितेन्द्र सिंह ने कहा कि इससे भर्ती, चयन प्रक्रिया और प्लेसमेंट की प्रक्रिया बेहद आसान हो जाएगी। नए फैसले के मुताबिक सीईटी में सफल उम्मीदवारों की एक मेरिट लिस्ट तैयार होगी, जो तीन साल तक मान्य रहेगी। हालांकि जो उम्मीदवार अपना स्कोर बेहतर करना चाहेंगे वे पुन परीक्षा में बैठ सकेंगे। उन्होंने साफ किया कि सिर्फ आरंभिक परीक्षा एक होगी बाकी अन्य औपचारिकताएं और नियम पूर्व की भांति रहेंगे।

पीएम नरेंद्र मोदी ने भी इसे अहम फैसला बताते हुए कहा कि एजेंसी के गठन से करोड़ों युवाओं को फायदा होगा। सीईटी के जरिए अब कई तरह के टेस्ट की जरूरत नहीं होगी जिससे अभ्यर्थियों का समय और संसाधन बचेगा। इससे पारदर्शिता को भी बहुत बड़ा बल मिलेगा।

बतादें कि यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे ऐतिहासिक सुधारों में से एक है। यह भर्ती, चयन, नौकरी में आसानी और विशेष रूप से समाज के कुछ वर्गों के लिए जीवन यापन में आसानी लाएगा। मालूम हो कि आपको बता दें कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2020-21 में सरकारी नौकरियों के लिए नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी बनाने के प्रस्ताव की घोषणा की थी।

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