आखिरकार पीछे हटा ड्रैगन, रंग लाई अजीत डोभाल की कूटनीतिक बातचीत

दिल्ली, एमएम : पूर्वी लद्दाख के गलवान में चीन की सेना के करीब 2 किलोमीटर पीछे हटने की खबर है। बतादें कि पिछले 15 जून को लद्दाख के गलवान सेक्टर में चीनी सेना के साथ हुए हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे।  गलवान घाटी पर लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध के बीच दोनों सेनाएं पीछे हटना शुरू हो गई हैं। यह पिछले 48 घंटों में हुई गहन कूटनीतिक, सैन्य बातचीत और संपर्कों का परिणाम है।

इससे पहले रविवार को खबर आई थी कि सीमा पर आठ हफ्तों से जारी गतिरोध के बीच नई दिल्ली सीमा वार्ता पर विशेष प्रतिनिधि तंत्र को सक्रिय करने पर विचार कर रहा है। इसमें भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल अपने चीनी समकक्ष चीन के स्टेट काउंसिलर और विदेश मंत्री वांग यी के साथ बातचीत करेंगे। जिसका एकमात्र उद्देश्य स्थिति को सामान्य करना होगा। फिर रविवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकर अजीत डोभाल ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से रविवार को वीडियो कॉल पर बात की।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक दोनों के बीच बातचीत सौहार्दपूर्ण आगे के कदमों को लेकर हुई। इस बातचीत के दौरान एनएसए अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी का पूरा फोकस शांति और अमन की बहाली सुनिश्चित करना और भविष्य में ऐसी घटना न हो इसके लिए साथ मिलकर काम करने पर था।

वहीं चीन के पूर्वी लद्दाख में कुछ प्वाइंट पर पीछे हटने के संकेत पांच दिन पहले हुई कॉर्प्स-कमांडर स्तर की वार्ता में मिल गए थे। जब दोनों देशों की सेनाएं चरणबद्ध तरीके से पीछे हटने के लिए तैयार हुई थीं। इसके तहत, दोनों पक्षों को मैनपावर और संरचनाओं को वापस लेना था और पांच जुलाई को इसका एक सत्यापन किया जाना था।

कमांडर स्तर की बातचीत में 30 जून को बनी सहमति के मुताबिक चीनी सैनिक पीछे हटे या नहीं,  इसको लेकर रविवार को एक सर्वे किया गया। अधिकारी ने बताया, ”चीनी सैनिक हिंसक झड़प वाले स्थान से दो किमी पीछे हट गए हैं। अस्थायी ढांचे दोनों पक्ष हटा रहे हैं।” उन्होंने बताया कि बदलवा को जांचने के लिए फिजिकल वेरीफिकेशन भी किया गया है।

दोनों देशों की सेनाओं के बीच लद्दाख में एलएसी पर करीब दो महीने से टकराव के हालात बने हुए हैं। छह जून को हालांकि दोनों सेनाओं में पीछे हटने पर सहमति बन गई थी लेकिन चीन उसका क्रियान्वयन नहीं कर रहा था। इसके चलते 15 जून को दोनों सेनाओं के बीच खूनी झड़प भी हो चुकी है। इसके बाद दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच बात हुई और 22 जून को सैन्य कमांडरों ने भी मैराथन बैठक की थी।

बतादें कि 15 जून की घटना के बाद से भारत ने 3,488 किलोमीटर वास्तविक नियंत्रण रेखा एलएसी पर अपने विशेष युद्ध बलों को तैनात किया है, जो कि चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के पश्चिमी, मध्य या पूर्वी सेक्टरों में किसी भी प्रकार के हमले से जूझ सकते हैं। शीर्ष सरकारी सूत्रों ने पुष्टि की है कि भारतीय सेना को पीएलए द्वारा सीमा पार से किसी भी हरकत का आक्रामकता से एलएसी पर जवाब देने का निर्देश दिया गया है।

 

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