बाबाधाम मे जल चढाने निकले हजारों कांवरिये, रोकने पर पुलिस पर किया पथराव, दुम्मा बॉर्डर पर झारखंड पुलिस ने बढाई चौकसी

रांची,एमएम :  ये बात सही है कि इस बार बाबाधाम में जलाभिषेक और कांवड़ यात्रा के लिए रांची हाईकोर्ट ने इजाजत नहीं दी। कारण देश भर में कोरोना संकट चल रहा है। कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकार हा कोशिश कर रही है। लेकिन कुछ कांवरिये इस बात को नजरंदाज कर रहे हैं। कल सोमवार को सावन की पहली सोमवारी थी। सावन के पहले दिन और पहली सोमवारी को भागलपुर जिला के सुल्तानगंज स्थित पवित्र उत्तर वाहिनी गंगा में 40 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने डुबकी लगायी। बड़ी संख्या में कांवरिये गंगा जल लेकर बाबाधाम रवाना हो चुके हैं। इन श्रद्धालुओं ने अजगैबीनाथ मंदिर के बाहर ही जलार्पण किया। इनको जब रोका गया तो इन लोगों ने पुलिस बल पर पथराव तक कर दिया। बतादें की धार्मिक न्यास परिषद के आदेश के बाद 4 अगस्त तक सभी शिव मंदिर बंद कर दिए गए हैं।

इसी घटना को देखते हुए सुल्तानगंज से गंगा जल लेकर आये कांवरियों के पथराव के एक दिन बाद सोमवार को झारखंड पुलिस ने बिहार और झारखंड की सीमा पर स्थित दुम्मा बॉर्डर पर चौकसी बढ़ा दी है। देवघर जिला की सभी सीमाओं को सील कर दिया गया है। देवघर में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को रोकने के लिए बाबानगरी में त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गयी है। सात अस्थायी टीओपी के साथ तीन स्थायी टोओपी बनाये गये हैं। सात इंट्री प्वाइंट को भी सील कर दिया गया।

देवघर के एसपी ने पुलिसकर्मियों से कहा है कि किसी भी हाल में देवघर में बिहार, ओड़िशा, बंगाल या बाहर से आने वाले किसी भी श्रद्धालु से भरे बस या वाहन को शहर में प्रवेश नहीं देना है। इस बात का ध्यान रखना है कि कहीं बस की जगह श्रद्धालु ट्रक पर सवार होकर न पहुंच जायें। इससे समस्या उत्पन्न हो सकती है। उन सभी को समझा-बुझाकर वापस भेजना है।

एसपी ने यह भी हिदायत दी है कि किसी भी हाल में देवघर आने की कोशिश करने वाले श्रद्धालुओं के साथ दुर्व्यवहार नहीं होना चाहिए। देवघर में सुरक्षा-व्यवस्था व विधि-व्यवस्था बनाये रखने के लिए देवघर प्रशासन की मांग पर एक हजार से अधिक पुलिस पदाधिकारी व पुलिसकर्मी देवघर पहुंच गये हैं।

ज्ञात हो कि कोरोना वायरस के संक्रमण के मद्देनजर इस वर्ष श्रावणी मेला का आयोजन नहीं हो रहा है। लॉकडाउन का सख्ती से पालन करने के लिए कहा जा रहा है, लेकिन श्रद्धालु हैं कि मानने का नाम नहीं ले रहे।

भक्तों को यह भी पता है कि उन्हें देवघर की सीमा में प्रवेश नहीं करने दिया जायेगा, लेकिन वह बाबानगरी में जल अर्पण करने पर उतारू हैं। उनका कहना है कि बाबाधाम की धरती पर भी जल चढ़ा देंगे, तो बाबा प्रसन्न हो जायेंगे।

 

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