कांग्रेस में खत्म नहीं हुई अंदरूनी कलह, सोनिया गांधी को पत्र लिखने वाले 23 नेताओं ने की बैठक, सिब्बल बोले- मेरे लिए पद नहीं, देश अहम

दिल्ली,एमएम : भले ही सर्वसम्मति के नाम पर सोमवार को हुई कांग्रेस कार्यसमिति के बैठक में सोनिया गाँधी को अगले छह महीने के लिए अंतरिम अध्यक्ष बना दिया गया हो। लेकिन कांग्रेस में चल रही अंदरूनी कलह अभी खत्म नहीं हुई है। कपिल सिब्बल के आज किए गए ट्वीट ने कई तरह की अटकलों को हवा दे दी है। इससे पहले कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) में सोनिया गांधी को फिर से अंतरिम अध्यक्ष चुने जाने के बाद सोमवार को कपिल सिब्बल, शशि थरूर सहित कुछ वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने गुलाम नबी आजादी के आवास पर बैठक की। ये वही नेता है, जिन्होंने संगठन में बदलाव को लेकर सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखी थी।

कपिल सिब्बल के ट्वीट पर कयासबाजियों का दौर शुरू हो गया है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, ‘यह किसी पद की बात नहीं है। यह मेरे देश की बात है, जो सबसे ज्यादा जरूरी है।’

दूसरी तरफ, कांग्रेस नेता अनिल शास्त्री का कहना है कि कांग्रेस का नेतृत्व अगर गांधी परिवार के हाथ में नहीं रहेगा तो पार्टी जीवित नहीं रहेगी, पार्टी को बचाये रखने के लिए अध्यक्ष गांधी परिवार में से ही होना चाहिए। इशारों में ही उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता जैसे सोनिया गांधी और राहुल गांधी पार्टी नेताओं से मिलना शुरू करते हैं, तो 50 फीसद समस्या हल हो जाएगी।

बतादें कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी में नेतृत्व के मुद्दे पर सोनिया गांधी को पत्र लिखने वाले नेताओं पर निशाना साधा और कहा कि जब पार्टी राजस्थान एवं मध्य प्रदेश में विरोधी ताकतों से लड़ रही थी और सोनिया गांधी अस्वस्थ थीं तो उस समय ऐसा पत्र क्यों लिखा गया।

राहुल ने चिट्ठी लिखने वाले वरिष्ठ नेताओं पर भाजपा से सांठगांठ का आरोप जड़ दिया। प्रतिक्रिया में गुलाम नबी आजाद, कपिल सिब्बल जैसे नेताओं ने आरोप साबित होने पर इस्तीफे तक की पेशकश कर दी। हालांकि, बाद में राहुल ने हर किसी को फोन कर सफाई दी कि उनका आरोप उन लोगों के लिए था, जो कांग्रेस के हितों की अनदेखी कर रहे हैं।

इधर कांग्रेस कार्य समिति में सोनिया गांधी को संगठन स्तर पर सुधार करने के लिए लिखी गई चिट्ठी पर हुई बहस के बाद पत्र लिखने वाले कपिल सिब्बल, शशि थरूर सहित कुछ वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने सोमवार शाम को गुलाम नबी आजादी के आवास पर बैठक की।  राष्ट्रीय राजधानी में हुई इस बैठक में मुकुल वासनिक और मनीष तिवारी के साथ-साथ पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले कुछ अन्य नेता भी शामिल हुए।

कांग्रेसी सूत्रों के मुताबिक पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले 23 नेताओं में कुछ ही सीडब्ल्यूसी के सदस्य हैं। गौरतलब है कि पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद, पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल, शशि थरूर, मनीष तिवारी, आनंद शर्मा, पीजे कुरियन, रेणुका चौधरी, मिलिंद देवड़ा और अजय सिंह शामिल हैं। इनके अलावा सांसद विवेक तन्खा, सीडब्ल्यूसी सदस्य मुकुल वासनिक और जितिन प्रसाद, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, राजेंद्र कौर भट्ठल, एम वीरप्पा मोइली और पृथ्वीराज चव्हाण ने भी पत्र पर दस्तखत किए हैं।

उत्तरप्रदेश प्रदेश कांग्रेस समिति (पीसीसी) के पूर्व अध्यक्ष राज बब्बर, दिल्ली पीसीसी के पूर्व अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली, हिमाचल प्रदेश पीसीसी के पूर्व अध्यक्ष कौल सिंह ठाकुर, बिहार अभियान के मौजूदा अध्यक्ष अखिलेश सिंह, हरियाणा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष कुलदीप शर्मा, दिल्ली विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष योगनंद शास्त्री, पूर्व सांसद संदीप दीक्षित के हस्ताक्षर भी पत्र पर हैं।

जिन नेताओं ने सोनिया को चिट्ठी लिखी है उनपर सोनिया के वफादार माने जाने अहमद पटेल ने भी निशाना साधा है। सूत्रों के अनुसार, जिस तरह से सोनिया को फिर से अंतरिम अध्यक्ष चुना गया है उससे पार्टी में उनकी स्थिति और दमदार होकर उभरी है। वहीं, विरोध करने वाले नेताओं के लिए पार्टी में मुश्किलें बढ़ने के संकेत हैं।

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