भारी सदमे में सुशांत के पिता, घर आने का सपना दिखा पिता को जिंदगीभर के लिए छोड़ा अकेला

पटना, एमएम : कहते हैं विधि का विधान कोई टाल नहीं सकता। कभी कभी कोई घटना जिन्दगी को झकझोर देती है। कुछ ऐसा ही वाक्या  सुशांत के पिता के साथ हुआ। रविवार के दिन करीब 10 बजे वो नाश्ता के लिए अपने टेबल पर आए ही थे कि इतने मे फ़ोन की घंटी बजी। दुसरे तरफ उनकी बेटी रूबी थी और उसने जो खबर दी वाकई किसी पिता के लिए अपने आप को संभालना बहुत कठिन होता है। सुशांत के पिता के.के. सिंह से शनिवार को बात तो हुई थी और कहा था जल्दी ही पटना आऊंगा और साथ बैठ खूब गप्पें मारेंगे।

एक पिता को अपने बेटे की मौत को स्वीकार करना कितना कठिन होता है वो हीजानता है। दुःख की खबर सुनकर पिता बार-बार बेहोश हो रहें हैं। केके सिंह के यहां काम करने वाली लक्ष्मी देवी ने बताया कि उन्हें नहीं पता था कि फोन किसका है। वह किचन की सफाई कर रही थीं। प्लेट की आवाज से वह बाहर आई तो देखा केके सिंह बेहोश नीचे गिरे हुए हैं तो उन्होंने पड़ोसियों को आवाज देकर मदद के लिए बुलाया। उनकी स्थिति अच्छी नहीं कही जा सकती है।

सुशांत मूलत: पूर्णिया के रहने वाले थे। उनकी ननिहाल खगडि़या के बोरने गांव में है। पिता केके सिंह पटना के राजीव नगर स्थित अपने घर में एक केयरटेकर के साथ रहते हैं। बेटे की मौत की खबर सुनकर पिता सदमे में हैं। वे रह-रहकर उठकर चिल्‍लाते हैं, फिर बेहोश हो जा रहे हैं।

सुशांत के पड़ोस में रहने वाली अंजनी पाठक ने बताया कि आठ महीने पहले पिता से मिलने के लिए सुशांत राजीवनगर वाले अपने घर में आए थे। पड़ोसियों के अनुसार तब सुशांत पहले से बहुत बदले हुए दिख रहे थे। वह पहले सबसे ज्यादा बात नहीं करते थे, लेकिन आखिरी बार जब वो घर आए तो उन्होंने सबसे मुलाकात भी की थी और बच्चों के साथ क्रिकेट का मैच भी खेला था।

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