नहीं रहे प्रखर समाजवादी नेता रघुवंश प्रसाद सिंह, 74 की उम्र में दिल्ली एम्स में हुआ निधन

दिल्ली/पटना, एमएम : पूर्व केंद्रीय मंत्री, प्रखर समाजवादी नेता और बिहार के दिग्गज नेता रहे डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह का रविवार को निधन हो गया। 32 साल तक राजद प्रमुख लालू यादव के बेहद करीबी रहे रघुवंश प्रसाद दिल्ली स्थित एम्स में अंतिम सांसें ली। रघुवंश जी ने आज दोपहर 11.24 मिनट पर उन्होंने आखिरी सांस ली। बतादें कि रघुवंश पिछले 4 अगस्त से दिल्ली एम्स में  इलाजरत थे। उससे पहले उन्हें कोरोना भी हुआ था।

रघुवंश अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। वे अपने पीछे दो बेटे और एक बेटी को छोड़ गए हैं। अपने दो भाइयों में रघुवंश बड़े थे। उनके छोटे भाई रघुराज सिंह का पहले ही देहांत हो चुका है। उनकी धर्मपत्नी जानकी देवी भी अब इस दुनिया में नहीं हैं। रघुवंश बाबू को दो बेटे और एक बेटी है। रघुवंश प्रसाद के अलावे कोई दूसरा सदस्य राजनीति में सक्रिय नहीं ह।. रघुवंश प्रसाद के दोनों बेटे इंजीनियरिंग की पढ़ाई करके नौकरी कर रहे हैं। बड़े बेटे सत्यप्रकाश दिल्ली में  इंजीनियर हैं तो वहीं छोटे बेटे शशि शेखर हांगकांग में। एक बेटी है वो पत्रकार है और टीवी चैनल में काम करती हैं।

रघुवंश जब पटना एम्स में भर्ती थे, तब उन्होंने 23 जून को पार्टी उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। वे रामा सिंह के राजद में आने की खबरों को लेकर नाराज चल रहे थे। रघुवंश को 18 जून को कोरोना हो गया था। एक जुलाई को उन्हें पटना एम्स से छुट्टी मिल गई थी। रघुवंश 1977 में पहली बार विधायक बने थे। 5 बार सांसद चुने गए।

तीन दिन पहले ही उन्होंने राजद से इस्तीफा दे दिया था। मात्र 30  शब्दों की चिठ्ठी लिखकर लालू को भेज दिया था। अपने अंतिम क हिथ्थी में पार्टी के अंदर सब कुछ थीक नहीं होने का हवाला दिया था। चिठ्ठी के बाद से ही राजद के कर्ताधर्ता हासिए पर चले गए थे। अंतिम समय में उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश को भी वैशाली जिले के तीन काम करवाने को लेकर एक भावुक चिठ्ठी लिखे थे।

उनके निधन से बिहार के राजनीति में जो शुन्यता आई है उसकी भरपाई करना बहुत मुश्किल है। बहुत कम लोग जानते होंगे कि आज जो रोजगार के दृष्टि से भारत सरकार की महत्वपूर्ण योजना मनरेगा के असली जनक वही थे। यूपीए एक में ग्रामीण विकास मंत्री रहते हुए इस योजना की विस्तार दिया था। आज बिहार ही नहीं समाजवादी आंदोलन से जुड़े सभी लोग निःशब्द हैं। राजनीति के पुरोधा का इस तरह दुनियां को अलविदा कह देना कहीं ना कहीं राजनीतिक शुन्यता उत्पन्न हो गया है।

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