राजद को तीसरा बड़ा झटका, राबड़ी देवी की नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी खतरे में

पटना, एमएम : बिहार में चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक हाल चल तेज हो गई है। जहाँ एक तरफ महागठबंधन में सभ कुछ ठीक नहीं है। वहीँ सत्ताधारी गठबंधन को सब कुछ हरी-हरी दिख रही है। मंगलवार  राष्‍ट्रीय जनता दल के लिए ‘अमंगल’ ही रहा। पार्टी को झटके पर झटका लग रहा है। विधान परिषद में वर्तमान में आठ में से पांच विधान पार्षदों ने राजद से इस्‍तीफा देते हुए जदयू का दामन थाम लिया। वहीं, इसका गम अभी पार्टी नेताओं का छलक ही रहा था कि वरीय नेता रघुवंश प्रसाद सिंह के इस्‍तीफा देने की खबर आ गई। वे वैशाली के पूर्व सांसद रामा सिंह के राजद में आने को लेकर नाराज हैं। रामा सिंह के हाथों ही रघुवंश सिंह की लोकसभा चुनाव में हार हुई थी। अब तीसरे झटके के रूप में बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष की राबड़ी देवी की कुर्सी खतरे में पड़ गयी है। राजनीतिक समीकरण को देखते हुए राजनीतिक गलियारों के संकेत माने तो राबड़ी की नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी जानी तय है।

बिहार से आ रही खबरों के अनुसार, बिहार विधान परिषद में राबड़ी देवी की नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी खतरे में पड़ गई है। इसमें आंकड़ों का खेल है। नियम के मुताबिक कुल सीटों का 10 प्रतिशत मेंबर होना जरूरी है। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि राजद के पांच विधान पार्षदों के जदयू में शामिल हो जाने से अब उनकी संख्‍या सिर्फ तीन रह गई है। इनमें खुद राबड़ी देवी के अलावा रामचंद्र पूर्वे तथा सुबोध राय राजद के विधान पार्षद के रूप में रह गए हैं। बता दें कि दिलीप राय, राधा चरण सेठ, संजय प्रसाद, कमरे आलम और रणविजय सिंह ने मंगलवार को ही राजद  छोड़ जदयू का दामन थाम लिया है।

हालांकि, विधायकों के वोटों से भरी जाने वाली बिहार परिषद की नौ सीटों पर चुनाव होने वाला है। इसके लिए नामांकन जारी है। इस नौ सीटों में से राजद को तीन सीटें मिलनी तय है। राजद को तीन उम्‍मीदवारों के नाम फाइनल करने हैं, लेकिन इसमें भी अब तक उम्‍मीदवारों के नाम पर अंतिम मुहर नहीं लगी है। सूत्रों की मानें तो तेज प्रताप यादव अपने लिये अड़े हुए हैं। वहीं, राघोपुर के लोग भोला राय के लिए राबड़ी आवास पर प्रदर्शन किया था। राजद को तीन सीटें मिलने के बाद भी विधान परिषद में राजद के छह उम्‍मीदवार ही रह जाएंगे, जबकि मिनिमम आठ से नौ सीटें चाहिए। ऐसे में विधान परिषद में राबड़ी की नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी जानी तय मानी जा रही है।

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