राजस्थान में सियासी संकट बरकरार,रणनीति को लेकर कांग्रेस में मतभेद, राज्यपाल के सवालों को लेकर भी पार्टी में एक राय नहीं

जयपुर, एमएम : राजस्थान में शुरू हुए सियासी संकट का पटाक्षेप होते अभी दिखाई नहीं दे रहा है। सचिन पायलट बनाम अशोक गलहोत के इस लड़ाई में अब राज्य के राज्यपाल कलराज मिश्र को भी निशाना बनाया जा रहा है। एक तरफ जहां गलहोत सरकार विधानसभा सत्र बुलाने के लिए राज्यपाल पर लगातार दबाब बनाने की कोशिश कर रहें हैं। वहीं राज्यपाल ने कोरोना संकट का हवाला देकर कुछ खास दिशा निर्देश देते हुए 21 दिनों का नोटिस अवधि देते हुए सत्र शुरुआत करने की सलाह दी है। इसके बाद राजस्थान के सियासी गलियारे में अब हरेक पहलु पर गुप्त गु शुरू हो चुकी है।

एक तरफ जहां राजस्थान में सियासी संकट जारी है, लेकिन इस संकट को लेकर कांग्रेस खुद को ही घिरा हुआ महसूस कर रही हैं। पार्टी यह तय नहीं कर पा रही है कि अब आगे की रणनीति क्या होगी। पार्टी इस मुद्दे पर राज्यपाल से सीधे टकराव से भी बचना चाहती है।

राजस्थान संकट पर पार्टी की रणनीति से जुड़े एक वरिष्ठ नेता की माने तो राज्यपाल की शर्तों को लेकर पार्टी में दो राय है। कुछ नेताओं का मानना है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सरकार को अपनी शर्तों पर कायम रहना चाहिए। जबकि कई दूसरे नेताओं की राय है कि हमे इस वक्त राज्यपाल की 21 दिन की राय को स्वीकार कर लेना चाहिए।

पार्टी का कहना है कि राजस्थान विधानसभा में कई बार 21 दिन से कम के नोटिस पर विधानसभा बुलाई गई है। 12वीं विधानसभा में दो बार, 13वीं विधानसभा में सात, चौदहवीं में एक और 15वीं विधानसभा में भी तीन बार अभी तक 21 दिन से कम के नोटिस पर विधानसभा का सत्र बुलाई गई है।

पार्टी के कई नेता मानते है कि इस लड़ाई को अदालत के बजाए राजनीतिक तौर पर लड़ना चाहिए। पार्टी की चिंता यह है इतने लंबे वक्त तक विधायको को एकजुट रखना मुश्किल होगा। पर पार्टी को यह जोखिम उठाते हुए राजनीतिक तौर पर इस लड़ाई को लड़ना चाहिए।

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