नेपाल ने दी भारत को धमकी- तटबंध हटा लें, नहीं तो तोड़ देंगे, बढ़ी बाढ़ की आशंका

पटना, एमएम : नेपाल है की मानता नहीं। नेपाल में हो रहे सियासी उठा पटक के बीच भारत से रोज नए पंगे ले रहा है। नेपाल ने अब भारत को धमकी दी है कि अगर भारत तटबंध नहीं हटाता तो वो उसे तोड़ दिया जाएगा। इससे अब बिहार में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। भारत-नेपाल बॉर्डर के पूर्वी चंपारण के ढाका प्रखंड के बलुआ के बंजरहा के समीप लालबकेया नदी के गुआबारी तटबंध का मामला फिर गरमाने लगा है। नेपाल प्रशासन इसे नो मेंस लैंड पर बनाया हुआ बता रहा है। जबकि हाल में इसको लेकर जारी विवाद में सहमति बनने के बाद तटबंध की मरम्मति का काम शुरू हुआ था। ताजा विवाद के बाद फिर से दोनों देशों के प्रशासनिक अधिकारी आमने-सामने आ गए हैं।

मालूम हो कि इसी साल 25 मई को नेपाल प्रशासन ने गुआबारी तटबंध के इस हिस्से का निर्माण कार्य रोक दिया था। काफी दिनों तक तनातनी की स्थिति रहने के बाद हाल में मरम्मत का काम शुरू हुआ था।

नेपाल के रौतहट जिला प्रशासन ने बंजरहा के पास भारतीय सीमा में नो मेंस लैंड से सटे हुए लालबकेया नदी के तटबंध के एक हिस्से को हटाने की धमकी देते हुए कहा है कि हटाएं अन्यथा इसे तोड़ देंगे। नेपाल ने दावा किया है कि बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग ने दो मीटर चौड़ा और 200 मीटर लंबा तटबंध नो-मेंस लैंड को अतिक्रमित कर बनाया है।

चेतावनी देते हुए नेपाल ने कहा है कि अगर इसे हटाया नहीं गया तो इसे तोड़ कर हटा देंगे। इससे अब खतरा इस बात का है कि बरसात के इस मौसम में अगर नेपाल से सटे तटबंध को हटाया गया, तो इलाके के लोगों को बाढ़ से जान-माल का भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।

रौतहट के जिलाधिकारी वासुदेव घिमिरे ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नेपाली मीडियाकर्मियों से कहा है कि दोनों देशों की भू-मापक टीम द्वारा की गयी पैमाइश में पाया गया है कि बॉर्डर पिलर संख्या 346/5 से पिलर संख्या 346/7 के बीच 11 स्थानों पर पिलर बनाया गया है। मापी में पाया गया है कि बांध को कहीं दो मीटर तो कहीं एक मीटर नो-मेंस लैंड को अतिक्रमित कर बनाया गया है। इस बाबत पूछने पर पूर्वी चंपारण के डीएम शीर्षत कपिल अशोक ने बताया कि इस संबंध में उन्हें राज्य या भारत सरकार से कोई रिपोर्ट नहीं मिली है।

उन्होंने बताया गया है कि दोनों देशों के सुरक्षाकर्मियों व अधिकारियों की उपस्थिति में नो-मेंस लैंड को अतिक्रमण कर बागमती तटबंध बनाने की पुष्टि के बाद नो-मेंस लैंड को खाली करने पर सहमति बनी है। नो-मेंस लैंड के बीच में बने पिलर से 9.1 मीटर उत्तर व दक्षिण अर्थात 18.2 मीटर नो-मेंस लैंड की जमीन पहले से ही निर्धारित है।

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