नेपाल संसद में पास विवादित नक्शा, भारत से सीमा विवाद पर बातचीत की गुंजाइश खत्म

नई दिल्ली, न्यूज़ डेस्क, एमएमः शनिवार, 13 जून को 275 सदस्यों वाली नेपाल की संसद ने विवादित नक्शे में संशोधन का प्रस्ताव पास कर दिया। विवादित बिल के पक्ष में सदन में उपस्थित सभी 258 सांसदों ने मतदान किया। नए नक्शे में भारत के तीनों हिस्से कालापानी, लिपुलेख तथा लिम्पियाधुरा को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया है।
पिछले कुछ समय से भारत और नेपाल में सीमा विवाद के कारण रिश्ते तनावपूर्ण चल रहे हैं। 8 मई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लिपुलेख से धाराचूला तक बनाई गई सड़क का उद्घाटन किया था। इसके बाद नेपाल ने लिपुलेख को अपना हिस्सा बताते हुए विरोध किया था। 18 मई को नेपाल ने नया नक्शा जारी किया, इसमें भारत के तीन इलाके लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को अपना हिस्सा बताया।
नेपाली कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता पार्टी नेपाल और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी समेत प्रमुख विपक्षी दलों ने नए विवादित नक्शे को शामिल करते हुए राष्ट्रीय प्रतीक को अद्यतन करने के लिए संविधान की तीसरी अनुसूची को संशोधित करने संबंधी सरकारी विधेयक के पक्ष में मतदान किया। निचले सदन से पारित होने के बाद अब विधेयक को नेशनल असेंबली में भेजा जाएगा, जहां उसे एक बार फिर इसी प्रक्रिया से होकर गुजरना होगा। नेशनल असेंबली से विधेयक के पारित होने के बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद इसे संविधान में शामिल किया जाएगा।
नेपाली संसद ने मंगलवार 9 जून को आम सहमति से इस विधेयक के प्रस्ताव पर विचार करने पर सहमति जताई थी जिससे नए नक्शे को मंजूर किए जाने का रास्ता साफ हुआ। सरकार ने बुधवार 10 जून को विशेषज्ञों की एक नौ सदस्यीय समिति बनाई थी जो इलाके से संबंधित ऐतिहासिक तथ्य और साक्ष्यों को जुटाएगी।
भारत और नेपाल के बीच रिश्तों में उस वक्त तनाव दिखा जब रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने आठ मई को उत्तराखंड में लिपुलेख दर्रे को धारचुला से जोड़ने वाली रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 80 किलोमीटर लंबी सड़क का उद्घाटन किया। नेपाल ने इस सड़क के उद्घाटन पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया कि यह सड़क नेपाली क्षेत्र से होकर गुजरती है। भारत ने नेपाल के दावों को खारिज करते हुए दोहराया कि यह सड़क पूरी तरह उसके भूभाग में स्थित है।
नेपाल के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली ने इस महीने के शुरू में कहा था कि उनकी सरकार कालापानी मुद्दे का समाधान ऐतिहासिक तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर कूटनीतक प्रयासों और बातचीत के जरिये चाहती है। ओली ने बुधवार (10 जून) को नेपाली संसद में सवालों का जवाब देते हुए कहा, ष्हम भारत के कब्जे वाली जमीन को बातचीत के जरिए वापस लेंगे।ष् उन्होंने दावा किया कि भारत ने एक काली मंदिर बनाया, जिसमें ष्एक कृत्रिम काली नदीष् बनाई और कालापानी में सेना की तैनाती कर नेपाली क्षेत्र का अतिक्रमण किया। नदी दोनों देशों के बीच की सीमा है।
विदेशी मामलों के जानकारों की माने तो नेपाली संसद द्वारा विवादित नक्शे को पास किए जाने के बाद फ़िलहाल मौजूदा स्थिति में बातचीत के सारे दरबाज़े बंद हो चुके हैं। हालांकि शनिवार को ही आईएमए के पासिंग आउट परेड में थल सेना अध्यक्ष मनोज मुकुंद नरवणे ने ज़ोर देकर कहा था कि नेपाल के साथ हमारे संबंध बहुत मज़बूत हैं लेकिन उसके बाद ताज़ा हालात में बातचीत असंभव है।

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