झारखंड की सबसे बड़ी कपड़ा मिल ‘ओरिएंट क्राफ्ट’ पर लगा ताला, हजारों लोग हुए बेरोजगार

रांची, एमएम : इसे कुदरत का कहर कहें की या फिर राजनीतिक उदासीनता। एक तो कोरोना जैसे वैश्विक महामारी ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को धीमा कर दिया। लिहाजा लाखों लोगों पर रोजी रोटी का खतरा मंडरा रहा है। भारत में तो स्थिति कुछ ज्यादा ही खराब कही जा सकती है। लोगों के पास रोजगार का संकट बढ़ता ही जा रहा है। बेरोजगारों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इस बीच एक बड़ी खबर झारखंड से है। झारखंड का ओरिएंट क्राफ्ट मिल नाम तो सुना ही होगा उस पर ताला जड़ दिया गया है।

कभी इस मिल से सैंकड़ो लोगों को रोजगार मिलता था वे सब के सब बेरोजगार हो गए। जानकरी के मुताबिक  झारखंड की सबसे बड़ी कपड़ा मिल ओरियंट क्राफ्ट पर ताला लग गया है। रांची स्थित इस कंपनी की दोनों इकाइयों में उत्पादन अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया गया है। एक सप्ताह पहले तक मैनेजमेंट से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी ऑफिस आकर संचालन कर रहे थे। उनके आने पर भी अब स्थायी रूप से रोक लगा दी गई है। इसलिए निकट भविष्य में कंपनी के खुलने की संभावना पर ग्रहण लग गया है। इससे खेलगांव और इरबा स्थित दोनों यूनिटों को मिलाकर साढ़े तीन हजार कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं।

खेलगांव और इरबा स्थित कंपनी के विशाल परिसरों में केवल सिक्योरिटी कंपनी के चंद गार्ड बच गए हैं। सूत्रों की माने तो कंपनी की ओर से कच्चा माल और मशीनरी एनसीआर स्थित यूनिटों में ट्रांसफर की गई है। इससे लंबे समय तक कंपनी के नहीं खोले जाने या स्थायी रूप से बंद किए जाने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, ओरियंट क्राफ्ट के चेयरमैन सुधीर ढींगरा इससे इनकार करते हैं। कंपनी के प्रबंधन से जुड़े रहे अधिकारियों का कहना है कि अगर कंपनी दोबारा खुलती भी है तो नए सिरे से कर्मचारियों की नियुक्ति होगी। इनकी तादाद पहले से आधी होगी।

कंपनी को बंद करने के पीछे ओरियंट क्राफ्ट से जुड़े रहे अधिकारियों का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा झारखंड की टेक्सटाइल पॉलिसी के तहत तय सब्सिडी एक साल से नहीं दिया जाना कंपनी बंद करने के पीछे सबसे बड़ा कारण है। हालांकि, कोरोना के कारण भी अंतर्राष्ट्रीय बाजार से मांग में कमी आई है। लेकिन मांग की कमी से कंपनी बंद होना दूसरा कारण है। ज्ञात हो कि झारखंड सरकार की टेक्सटाइल प़ॉलिसी के तहत झारखंड में कपड़ा उत्पादन करने वाली कंपनियों के एक झारखंड को नौकरी देने के एवज में सात साल तक हर महीने पांच हजार रुपए देने के प्रावधान हैं।

इस बीच खबर है कि रांची में स्थित दो और बड़ी कपड़ा मिलों ने भी कंपनी के आधे कर्मचारियों को हटा दिया है। नामकुम के पास रामपुर स्थित अरविंद मिल में दो हजार कर्मचारी काम करते थे। अभी केवल पांच सौ लोगों को काम करने के लिए कहा गया है। ओरमांझी स्थित किशोर एक्सपोर्टस में 1500 कर्मचारी काम करते थे। अभी 650 को छोड़कर बाकी सबको हटा दिया गया है।

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