अब वैध हथियारों के लिए जाना जाएगा मुंगेर, अवैध हथियारों का युग खत्म

मुंगेर, एमएम : एक समय था जब मुंगेर देश-दुनिया में अवैध हथियारों की मंडी के रूप में बदनाम हो रहा था। स्थानीय स्तर पर कम दामों में भी तमंचा उपलब्ध था और लोग आसानी से खरीद लेते थे। 90 के दशक में बिहार में अपराध बढ़ना शुरू हुआ। लिहाजा हरेक छोटे बड़े अपराधी से लेकर छुटभैया तक तमंचे के नोक पर अपराध को अंजाम देने लगा। वो अवैध हथियार भले खरीदता कहीं और से लेकिन हरेक अपराध में मुंगेर से ताड़ जोड़ दिया जाता रहा है। लेकिन अब मुंगेर की पहचान बदलने वाली है। 1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान मुंगेर की इकाइयों ने ही सेना के लिए 410 मास्केट राइफल का निर्माण किया था। बंदूक फैक्ट्री में अब पिस्टल, रिवाल्वर, सेमी ऑटोमेटिक पिस्टल जैसे अत्याधुनिक हथियारों का निर्माण होगा। इसके लाइसेंस के लिए कई लोगों नें भारत सरकार को आवेदन दिया है। लाइसेंस मिलते ही छोटे हथियार निर्माण का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। जबकि पंप एक्शन 12 बोर का गन निर्माण कार्य नए रुप में शुरू हो गई है।

बंदूक निर्माण से जुड़े फाइजर एंड कंपनी के प्रोपराइटर सौरभ निधि ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अब निजी सेक्टर को छोटे हथियार बनाने की अनुमति दे दी है। उन्होंने यह भी कहा कि एक बंदूक बनाने के लिए नौ अलग-अलग कुशल मजदूरों की जरूरत पड़ती है। स्मॉल वेपन में मुंगेर देश के बाजार पर अपना दबदबा बनाने में सफल होगा क्योंकि मुंगेर में कुशल कारीगर उपलब्ध हैं। मुंगेर देश में सबसे सस्ता और सॉफिस्टिकेटेड पिस्टल, रिवाल्वर आदि का निर्माण करने में सक्षम है।

जानकारी के मुताबिक अंग्रेजों के भारत आने के बाद पहली बार आर्म्‍स एक्ट 1878 बना। आम्र्स एक्ट मैनुअल को साल 1924 में तैयार किया गया। इसके तहत बिहार में मुंगेर सहित अन्य शहरों के 20 लोगों को उनके परिसर में हथियार बनाने का लाइसेंस तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने दिया था। आजादी के बाद आर्म्‍स एक्ट 1948 में आर्म्स रूल्स साल 1962 में वजूद में आए। इसके तहत मुंगेर में सभी बंदूक निर्माण इकाइयों को एक छत के नीचे लाया गया। गौरतलब है कि भारत सरकार ने तब देशभर में 105 निजी बंदूक निर्माताओं को बंदूक निर्माण के लिए लाइसेंस दिया। जिसमे बिहार के मुंगेर की 37 बंदूक निर्माता कंपनियों को लाइसेंस मिला। साल 1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान मुंगेर की इकाइयों ने ही सेना के लिए 410 मास्केट राइफल का निर्माण किया था।

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