मिथिला को मिल सकता है कमला नदी के बाढ़ से मुक्ति, 405.66 करोड़ की लागत से बनेगा जयनगर बराज

मधुबनी. एमएम : बिहार में हरेक साल बाढ़ आना तय है। खास कर बिहार का मिथिला क्षेत्र हरेक साल बाढ़ की विभीषिका झेलने को मजबूर है। नेपाल से छोड़े गए पानी भी एक प्रमुख कारण है। जिसके चलते किसानों से लेकर आम आदमी तक को बहुत नुकसान उठाना पड़ता है। जान माल का नुकसान अलग से। बाढ़ का मुख्य कारण नदियों की उड़ाही ना होना भी है। दूसरा नदियों को जोड़ने से भी इसका समाधान किया जा सकता है। या नहीं तो बाँध या बैराज बनाकर इससे होने वाली क्षति को कम तो किया ही जा सकता है।

लिहाजा उन नदियों में से एक कमला भी है। जो बरसात में काफी तांडव मचाती है। इसी को देखते हुए मधुबनी जिले के जयनगर में कमला नदी पर निर्मित पुराने वीयर को अत्याधुनिक बराज में बदलने के लिए जल संसाधन विभाग ने 405.66 करोड़ रुपये का एस्टीमेट तैयार किया है। बराज के निर्माण से मिथिला के बड़े क्षेत्र को कमला नदी की बाढ़ से राहत मिलेगी। साथ ही मधुबनी जिले में 44,960 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा प्राप्त होगी, जिससे मुख्यत: जयनगर, बासोपट्टी, खजौली, लदनिया, कलुआही एवं हरलाखी प्रखंडों के किसान लाभान्वित होंगे।

जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने बताया कि जुलाई 2019 में कमला नदी में आई भीषण बाढ़ के दौरान वीयर के डेक स्लैब के ऊपर से पानी प्रवाहित हो गया था। इससे वीहर के दाएं और बाएं मार्जिनल बांध टूट गया था। लिहाजा विभाग की ओर से आइआइटी रुड़की के जाने-माने विशेषज्ञ नयन शर्मा को इलाके का अध्ययन कर कमला की बाढ़ का दीर्घकालिक समाधान सुझाने की जिम्मेवारी सौंपी गयी थी। रिपोर्ट में कमला वीयर को बराज में परिवर्तित करने पर जोर दिया गया था। अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस साल 24 जून को जयनगर का दौरा किया था। तब उन्होंने कमला वीयर को बराज में बदलने के जल संसाधन विभाग के प्रस्ताव को मौके पर ही हरी झंडी देते हुए यहां अत्याधुनिक बराज के निर्माण की घोषणा किया था। इस योजना को राज्य मंत्रिमंडल को स्वीकृति के लिए भेजा गया है।

बतादें कि फिलहाल कमला नदी पर पांच दशक पुराने वीयर में फॉलिंग शटर का प्रावधान है। बाढ़ आने पर वीयर के अपस्ट्रीम में भारी मात्रा में गाध जमा हो जाता है, जिससे फॉलिंग शटर जाम हो जाता है। पानी घटने पर शिल्ट को हटा कर फॉलिंग शटर को उठाना पड़ता है। इस प्रक्रिया में कई दिनों तक नहर में पानी का प्रवाह काफी कम हो जाता है। इस कारण वीयर से निर्धारित क्षमता के अनुरूप सिंचाई का लाभ नहीं मिल पाता है. पौंड लेवल ऊंचा करने से यहां अधिक पानी रोका जा सकेगा।

इसके अलावे मिथिला के बड़े क्षेत्र को कमला नदी की बाढ़ के कहर से बचाने के लिए भारत और नेपाल में बने कमला के बाएं और दाएं तटबंधों को आपस में जोड़ा जाएगा। मंत्री नेकहा है कि कमला नदी की बाढ़ के दीर्घकालिक समाधान की दिशा में इसे बेहद महत्वपूर्ण योजना है। इससे कमला नदी के किनारे बसे लाखों लोगों के लिए बड़ी सौगात साबित होगी।

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