कानपुर के संवासिनी गृह में 57 लड़कियां कोरोना पॉजिटिव, दो प्रेग्नेंट और एक को एड्स

कानपुर, एमएम : ये उत्तरप्रदेश है साहब। यहाँ कुछ भी हो सकता है। इसमे इतने ताजुब की क्या बात है। यहाँ बहुत कुछ ऐसा होता है जिसका तोड़ नहीं होता। आज पूरा देश कोरोना के चपेट में है। जाहिर है उत्तरप्रदेश भी इससे अछूता नहीं है। यहाँ भी कोरोना संक्रमण कुछ कम नहीं है। प्रदेश के मुखिया बड़े-बड़े दावे करते नजर आते है। लेकिन मामला जब पुलिस का हो तो साहेब कुछ ज्यादा ही पीठ ठोकते नजर आते हैं। यह सच भी है की पिछले कुछ सालों में जब से योगी जी आए हैं चोरों की चटकनी चटकने लगी है।

ताजा मामला यूपी के कानपुर शहर से है। जहाँ सरकारी बालिका संरक्षण गृह यानि संवासिनी गृह में रहने वाली लड़कियों की कोरोना रिपोर्ट आने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है। कानपुर के एक राजकीय बालिक संरक्षण गृह में रहने वाली लड़कियों में कोरोना के लक्षण दिख रहे थे। इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग को इसकी सूचना दी। स्वास्थ्य विभाग की टीम जब इन लड़कियों की जांच करानी शुरू की तो पता चला कि बाल संरक्षण गृह में रहने वाली दो लड़कियां गर्भवती हैं। एक को एचआईवी है तो एक लड़की हेपेटाइटिस सी से भी ग्रस्त है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, कानपुर स्थित इस राजकीय बाल संरक्षण गृह की 57 लड़कियों में कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई थी। इसके बाद इन लड़कियों को कोरोना के इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया। इस दौरान डॉक्टरों ने जांच में पाया कि दो लड़कियां जो महज 17 साल की है गर्भवती हैं। प्रेग्नेंट होने के साथ ही एक लड़की एचआईवी और एक हेपेटाइटिस सी के संक्रमण से ग्रसित है।

प्रशासन ने अब इस बालिका गृह को सील कर दिया है। साथ ही यहां के स्टाफ को क्वारंटाइन कर दिया गया है। अजब बात ये है कि डॉक्टरों ने गर्भवती लड़कियों के बारे में जब पुराने रिकॉर्ड के लिए संपर्क किया तो अधिकारियों के पास कुछ भी नहीं था। अधिकारियों का कहना है कि ये कब बालिक गृह आईं इसकी जानकारी नहीं है।

आज जब जाँच पड़ताल चल रहा था तो कुछ बातें ऐसी सामने आयी जिसे सुनकर आप भी हैरान हो जाएगें। चलो ये सब तो आम बात जैसी लगती हैं। मगर चिंता तो तब हुई जब जिले के डीएम और एसएसपी ने दावा किया है कि युवतियां यहां लाए जाने से पहले ही गर्भवती थीं। उनकी उम्र निर्धारण के लिए भी जांच कराई जाएगी।

एसएसपी दिनेश कुमार ने बताया कि 3 और 12 दिसम्बर 2019 में दोनों युवतियों को संवासिनी गृह में दाखिल कराया गया था। दोनों आगरा और कन्नौज में अपराध का शिकार हुई थीं। वहां पर दोनों के मामलों में एफआईआर भी दर्ज है। अधिकारी ने बताया कि वहां पर आरोपितों के खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई की गई, इसके बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। दोनों युवतियों को सीडब्ल्यूसी के सामने पेश किया गया था। उन्हीं के आदेश पर इन्हें संवासिनी गृह में दाखिल किया गया था।

इनमें से एक युवती एचआईवी और दूसरी हेपिटाइटिस सी से भी ग्रसित है। एचआईवी पीड़ित युवती के संबंध में एसएसपी दिनेश कुमार पी का कहना था कि जब संवासिनी गृह में युवतियों को दाखिल किया जाता है तो मेडिकल टेस्ट के बाद पूरा रिकॉर्ड तैयार किया जाता है। दोनों के कागजात रिकॉर्ड रूम में हैं, जो कोरोना के कारण सील है। मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन करते हुए जल्द ही रिकॉर्ड निकलवाकर जानकारी दी जाएगी।

वही जिलाधिकारी ब्रह्मदेवराम तिवारी ने बताया कि राजकीय संरक्षण गृह में अब तक 57 संवासिनी संक्रमित पाई गई हैं। इस वक्त 07 गर्भवती हैं। इनमें से पांच की रिपोर्ट पॉजिटिव तथा दो की निगेटिव आई है। ये सभी आगरा, एटा, कन्नौज, फिरोजाबाद और कानपुर के बाल कल्याण समिति के आदेश पर यहां भेजी गई हैं।

बतादें कि संवासिनी गृह के एक हिस्से में बाल गृह बालिका और दूसरे हिस्से में महिला शरणालय है। प्रोबेशन अधिकारी अजित कुमार ने बताया कि वर्तमान में बालगृह में 170 बलिकाएं और 59 महिलाएं रहती हैं। उन्होंने बताया कि संवासिनी गृह को सील करा दिया गया है। समाचार लिखे जाने तक जाँच जारी था। अभी तक इस मामले में किसी को नामजद अभियुक भी नहीं बना गया है।

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