बिहार में गुरुवार तक नहीं मिलेगी बारिश से राहत, बाढ़ग्रस्त इलाकों में बढ़ी चिंता

पटना, एमएम : बिहार में मौसम ने फिर करवट ली है। मंगलवार से शुरू बारिश बुधवार को भी जारी है। मौसम विभाग ने पटना सहित राज्‍य के कई जिलों के लिए आज भी बारिश व वज्रपात का अलर्ट जारी किया है। आज पटना, भोजपुर, वैशाली, समस्‍तीपुर, सिवान, सारण, गोपालगंज, पश्चिम चंपारण व पूर्वी चंपारण के लिए भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। राजधानी पटना की बात करें तो यहां सुबह से ही भारी बारिश हो रही है। बारिश के कारण राजधानी के कई इलाके जल-जमाव में डूब गए हैं। मौसम विभाग के अनुसार मानसून की अक्षीय रेखा बंगाल की खाड़ी में जा रही है, जिस कारण से आ रही नमी के कारण गुरुवार तक रुक-रुक कर बारिश होती रहेगी।

लगातार हो रहे बारिश से नदियों के जलस्तर में वृद्धि देखि जा रही है। ऐसे में गंडक, बूढ़ी गंडक, कमला बालन भुतही और बागमती जैसी नदियां फिर से बाढ़ क्षेत्र को खतरे में डाल सकती हैं। इस आशंका से बाढ़ पीड़ित डरे हुए हैं। वहीं जल संसाधन विभाग और आपदा प्रबंधन की टीमों को अलर्ट मोड में रखा गया है। हालांकि अभी मुख्य तीन नदियों गंडक, बूढ़ी गंडक व बागमती के जलस्तर में कमी आयी है। फिर भी दो नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।

मुजफ्फरपुर में बूढ़ी गंडक व बागमती का जलस्तर अब भी खतरे के निशान से ऊपर है। बूढ़ी गंडक का पानी लगातार तिरहुत नहर के टूटे तटबंध से जिले के दो हिस्सों में बढ़ रहा है। एक तरफ सकरा मनियारी होते हुए पानी वैशाली के पातेपुर की ओर बढ़ रहा है, तो दूसरी ओर टूटे पश्चिमी तटबंध से पानी मुशहरी प्रखंड की ओर फैल रहा है। उधर बागमती के असर वाले औराई, कटरा व गायघाट में लोगों ने राहत की सांस ली है। इन तीन प्रखंडों में पानी उतर रहा है। लेकिन सरैया, पारू व साहेबगंज के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में संकट अभी बरकरार है।

उधर, दरभंगा में नदियों के जलस्तर में कमी दर्ज की गई है। जलस्तर में कमी के बावजूद बागमती खतरे के निशान से ऊपर बनी हुई है तो अधवारा कमतौल में खतरे के निशान के ऊपर है। वहीं कमला सोनवर्षा में खतरे के निशान से काफी नीचे आ गई है। नदियों के जलस्तर में कमी के साथ शहर में बाढ़ की स्थिति में सुधार आना शुरू हो गया है। शहर के उत्तरी व दक्षिणी भाग में बाढ़ के पानी में दो फीट की कमी आई है। हालांकि हनुमाननगर में स्थिति अब भी खराब है।

उधर, चंपारण के चनपटिया में बूढ़ी गंडक के जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि लालबकेया में बूढ़ी गंडक का जलस्तर स्थिर पाया गया है। वाल्मीकिनगर बराज से मंगलवार को 1.86 लाख क्यूसेक पानी गंडक में छोड़ा गया है। चंपारण के दियारावर्ती प्रखंडों के लोग अभी बाढ़ की चिंता से उबर नहीं पाये हैं।

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