कांवड़ यात्रा से प्रसिद्धी पाने वाले गोल्डन बाबा का निधन, दिल्ली एम्स में ली अंतिम सांस

दिल्ली, एमएम : गोल्डन बाबा नाम तो सभी लोगों ने सुना ही होगा। पिछले 10 साल से लगातार सावन के महीने में सभी मीडिया में सुर्खियां बटोरते रहे। कांवड़ यात्रा के दौरान उनकी खूब चर्चा होती थी। शरीर पर भारी सोने के गहने पहलकर बीते कई साल से हरिद्वार से कांवड़ लाने वाले गोल्डन बाबा का देहांत हो गया। कैंसर की लंबी बीमार के बाद गोल्डन बाबा ने मंगलवार देर रात दिल्ली एम्स में आखिरी सांस ली। गोल्डन बाबा गाजियाबाद के इंदिरापुरम की जीसी ग्रैंड सोसाइटी में रहते थे।

गोल्डन बाबा का असली नाम सुधीर कुमार मक्कड़ था। संन्यासी बनने से पहले सुधीर कुमार मक्कड़ दिल्ली में गारमेंट्स का कारोबार किया करते थे। अपने पापों का प्रायश्चित करने के लिए सुधीर कुमार मक्कड़ गोल्डन बाबा बन गए। गांधी नगर के अशोक गली में गोल्डन बाबा का आश्रम भी है।

मिल रही जानकारी के मुताबिक सुधीर कुमार मक्कड़ को 1972 से ही सोना पहनना काफी पसंद था। गोल्डन बाबा करोड़ों रुपए के सोने के आभूषण पहनते थे, जिसके कारण वो हमेशा सुर्खियों में बने रहते थे। गोल्डन बाबा हर साल कई किलो सोना पहनकर और लग्जरी कारों के साथ कांवड़ यात्रा भी लेकर निकलते थे।

गोल्डन बाबा 2018 में 21 लक्जरी कारों और 20 किलो सोने के साथ कांवड़ यात्रा के लिए निकले थे। उनके गहनों में 25 सोने की चेन थी और प्रत्येक चेन कम से कम 500 ग्राम वजनी थी। इसके साथ ही 21 सोने के लॉकेट, सोने के दस्तबंद और रोलेक्स की घड़ी भी थी।

गोल्डन बाबा के निधन से उनके भक्तों और अनुयायियों में शोक का माहौल है। बुधवार सुबह गीता कॉलोनी श्मशान घाट पर बाबा का अंतिम संस्कार किया गया। कहा जा रहा है कि बाबा ने गीता कॉलोनी श्मशान घाट का काफी सुंदरीकरण किया था, घाट के बाहर लगी भोले बाबा की मूर्ति की वह अकसर पूजा करते थे। गोल्डन बाबा जब कांवड लेकर वापस लौटते थे तो वह भोले बाबा की मूर्ति के पास बने शिवाल्य पर जल चढ़ाते थे। इसलिए इनका अंतिम संस्कार यहीं किया गया।

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