मधुबनी से सहरसा तक बनेगा देश का सबसे लम्बा पुल, 13.2 किमी होगी इसकी लम्बाई, रखी गई नीव

मधुबनी, एमएम : लगता है अब बिहार में विकास की आंधी बहने वाली है। वैसे तो पिछले 10 सालों में बिहार में सड़क और बिजली का खूब विकास हुआ है। इसमें कोई दोराई नहीं कि सड़क और बिजली के कारण बिहार में सुख सुविधा भी बढ़ी है। लोग कम समय में एक जगह से दुसरे जगह आ-जा सकते हैं। रोड अच्छी होने से परिवहन सेवा भी ठीक हो गई है। वहीं बिहार के कुछ क्षेत्र में अभी भी सड़क की सुगमता नहीं है। खैर सरकार इस दिशा में काम करा रही है। बेसिक इनस्फ्रासत्क्चर बन जाने से रोजगार की संभावना भी बढ़ने लगी है। हो सकता है आने वाले समय में मिथिला क्षेत्र से पलायन पर भी रोक लगे।

इसी कड़ी में भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत मधुबनी जिले के भेजा में गुरुवार को कोसी नदी पर बनने वाले देश के सबसे लंबे सड़क पुल के पहले पाये की नींव रखी गई। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच एनएचएआइ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर एएन ङ्क्षसह, प्रोजेक्ट मैनेजर रेड्डी नागेश्वर राव और मुरली कृष्णा ने संयुक्त रूप से भूमि पूजन किया। इससे लोगों में खुशी है। पुल बनने के बाद मधुबनी जिले से सहरसा, सुपौल जाने की राह आसान हो जाएगी।

एनएचएआइ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर के मुताबिक यह पुल को अगले पांच साल में पूर्ण करने का लक्ष्य है। इसे गैमन इंजीनियरिंग कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड व ट्रांसरेल लाइङ्क्षटग लिमिटेड द्वार बनाया जाएगा। इसका निर्माण मधुबनी जिले के भेजा से सुपौल जिले के बकौर तक होना है। इसकी लंबाई 13.2 किलोमीटर है। इसमें कुल 171 पिलर होंगे। 10.27 किमी लंबे इस दोलेन पुल की लागत 984 करोड़ है। इस पुल में मधुबनी के भेजा छोर पर 1.1 किमी व सुपौल के बकौर छोर पर 2.1 किलोमीटर एप्रोच पथ होगा। 50 मीटर लंबाई वाले 50 स्पैन होंगे। टू लेन सड़क की चौड़ाई 11 मीटर व दोनों तरफ 1.5-1.5 मीटर के फुटपाथ होंगे।

बतादें कि देश में अभी सबसे लंबा 9.28  किमी पुल असम के गुवाहाटी में ब्रह्मïपुत्र नदी पर है। इस पुल से मिथिला के प्रमुख धार्मिक स्थलों को जोडऩे की योजना है। मधुबनी की प्रसिद्ध उच्चैठ भगवती व सहरसा में महिषि तारास्थान का जुड़ाव सीधे होगा।  यह पुल मधुबनी जिले के हरलाखी प्रखंड के उमगांव से सोपट्टी-बेनीपट्टी-रहिका-मधुबनी-रामपट्टी-अवाम-लौफा-भेजा-सुपौल-महिषी-सहरसा के बीच 160 किमी एनएच की मंजूरी हो चुकी है। नया एनएच 227जे और 227 एल होगा। जो मौजूदा एनएच 527-ए से दरभंगा-जयनगर, 327-ई सुपौल-सहरसा और एनएच-107 महेशखूंट-सहरसा-मधेपुरा-पूर्णिया से जुड़ेगा। पांच फेज में बनने वाली कुल 2582 करोड़ की परियोजना में यह पुल भी शामिल है।

यह पुल सामरिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। नेपाल, बांग्लादेश और भूटान के साथ उतत्र-पूर्व के राज्यों को जुडऩे में यह कारगर साबित होगा। इसके बनने के बाद आसान होगा।

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