पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का 84 साल की उम्र में निधन, दिल्ली के आर.आर अस्पताल में थे भर्ती

दिल्ली, एमएम : पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का 84 वर्ष की उम्र में सोमवार को निधन हो गया। वह लंबे समय से दिल्ली के अस्पताल में भर्ती थे। प्रणब मुखर्जी के बेटे ने पूर्व राष्ट्रपति के निधन की जानकारी दी है।  दिल्ली कैंट स्थित आर्मी रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल में उनका इलाज किया जा रहा था। आज सुबह ही अस्पताल की तरफ से बताया गया था कि उनके फेफड़ों में संक्रमण की वजह से वह सेप्टिक शॉक में थे।

बतादें कि सेप्टिक शॉक एक ऐसी गंभीर स्थिति है, जिसमें रक्तचाप काम करना बंद कर देता है और शरीर के अंग पर्याप्त ऑक्सीजन प्राप्त करने में विफल हो जाते हैं।

पिछले कई दिनों से मुखर्जी गहरे कोमा में और वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे। पूर्व राष्ट्रपति को 10 अगस्त को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और उनकी मस्तिष्क की सर्जरी की गई थी। बाद में उनके फेफड़ों में भी संक्रमण हो गया था।

प्रणव कुमार मुखर्जी भारत के तेरहवें राष्ट्रपति रह चुके हैं। भारत के राष्ट्रपति के रूप में उन्होंने 2012 से 2017 तक देश की सेवा की। 26 जनवरी 2019 को प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न से सम्मानित किया गया है! वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे हैं। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन ने उन्हें अपना उम्मीदवार घोषित किया था।

प्रणव मुखर्जी को भारतीय राजनीति का विकिपीडिया कहा जाता था। इसका जनम 11 दिसम्बर 1935 को ओअश्चिम बंगाल के वीरभूमि जिले के शहर के निकट स्थित मिराती गाँव के एक ब्राह्मण परिवार में कामदा किंकर मुखर्जी और राजलक्ष्मी मुखर्जी के यहाँ हुआ था।

उनके पिता 1920 से कांग्रेस पार्टी में सक्रिय होने के साथ पश्चिम बंगाल विधान परिषद में 1952 से 64 तक सदस्य और वीरभूम (पश्चिम बंगाल) जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रह चुके थे। उनके पिता एक सम्मानित स्वतन्त्रता सेनानी थे, जिन्होंने ब्रिटिश शासन की खिलाफत के परिणामस्वरूप 10 वर्षो से अधिक जेल की सजा भी काटी थी।

प्रणव मुखर्जी ने वीरभूमि के सूरी विद्यासागर कॉलज से अपनी पढाई की जो उस समय कलकत्ता विश्वविद्यालय से संबद्ध था। उनका संसदीय जीवन करीब पाँच दशक पुराना है, जो 1969 में कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा सदस्य के रूप में से शुरू हुआ था। वे 1975, 1981, 1993 और 1999 में फिर से चुने गये। 1973 में वे औद्योगिक विकास विभाग के केंद्रीय उप मन्त्री के रूप में मन्त्रिमण्डल में शामिल हुए।

वे सन 1982 से 1984 तक कई कैबिनेट पदों के लिए चुने जाते रहे और और सन् 1984 में वो पहली बार भारत के वित मंत्री बने। सन 1984 में यूरोमनी पत्रिका के एक सर्वेक्षण में उनका विश्व के सबसे अच्छे वित्त मंत्री के रूप में मूल्यांकन किया गया। प्रणव दा को कुछ समय के लिए कांग्रेस से निकल दिया गया था। तब उन्होंने राष्ट्रीय समाजवादी पार्टी बना ली थी। हालांकि बाद में राजीव गांधी के साथ समझौता होने के बाद उन्होंने अपने दल का कांग्रेस पार्टी में विलय कर दिया था। 1997 में उन्हें उतकृष्ट सांसद चुना गया।

सन 1985 के बाद से वह कांग्रेस पार्टी की पश्चिम बंगाल राज्य इकाई के भी अध्यक्ष थे। सन 2004 में, पहली बार लोकसभा चुनाव जीतने वाले प्रणव मुखर्जी को लोकसभा में सदन का नेता बनाया गया था। उन्हें रक्षा, वित्त, विदेश विषयक मन्त्रालय, राजस्व, नौवहन, परिवहन, संचार, आर्थिक मामले, वाणिज्य और उद्योग, समेत विभिन्न महत्वपूर्ण मन्त्रालयों के मंत्री होने का गौरव भी हासिल है।

उन्होंने कई किताबें भी लिखी जिसमें द कोलिएशन ईयर की खूब चर्चा हुई। इसके अलावे द डेमेत्रिक डिकेड, द तेबुलेंट ईयर,बियॉन्ड सरवाइवल और थॉट्स एंडरिफ्लेक्टशन प्रमुख हैं।

Leave a Reply