भारत की आस्था, आदर्श और दर्शन में सिर्फ राम : प्रधानमंत्री मोदी

अयोध्या, एमएम : वर्षों से बहु प्रतीक्षित राम मंदिर की नीव बुधवार को देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रखी। अयोध्या में श्रीराम मंदिर के आधारशिला रखने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने अपना संबोधन जय सिया राम के साथ प्रारंभ किया। बतादें कि शुभ मुहूर्त के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कार्यक्रम स्थल पर बने मंच पर पहुंचे हैं। इस दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, संघ प्रमुख मोहन भागवत और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद थे। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मुझे आमंत्रित किया और मुझे इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने का अवसर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज पूरा देश रोमांचित है, हर मन दीपमय है। आज पूरा भारत भावुक है। सदियों का इंतजार आज समाप्त हो रहा है।

पीएम मोदी ने कहा, ‘भारत आज भगवान भास्कर के सानिध्य में सरयू के किनारे एक स्वर्णिम अध्याय रच रहा है। आज श्रीराम का जयघोष सिर्फ सिया-राम की धरती में ही नहीं सुनाई दे रहा, इसकी गूंज पूरे विश्व में है। सभी देशवासियों को, विश्व में फैले करोड़ों राम भक्तों को आज के इस सुअवसर पर कोटि-कोटि बधाई।’

पीएम मोदी ने कहा कि आज पूरा भारत भावुक है। सदियों का इंतजार आज समाप्त हो रहा है। करोड़ों लोगों को आज ये विश्वास ही नहीं हो रहा होगा कि वो अपने जीते-जी इस पावन दिन को देख पा रहे हैं। बरसों से टाट और टेंट के नीचे रह रहे हमारे रामलला के लिए अब एक भव्य मंदिर का निर्माण होगा।

पीएम मोदी ने रामलला भूमिपूजन के शिलापट्ट का भी अनावरण किया. शिलापट्ट पर महंत नृत्य गोपाल दास, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, सीएम योगी आदित्यनाथ और मोहन भागवत का नाम है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस तरह केवट से लेकर वनवासी बंधुओ को भगवान राम की विजय का माध्यम बना। जिस तरह दलितों पिछड़ों आदिवासियों समाज के हर वर्ग ने आजादी की लड़ाई में गांधी जी को सहयोग दिया, उसी तरह आज देशभर के लोगों के सहयोग से राम मंदिर निर्माण का यह पुण्य कार्य प्रारंभ हुआ है।

इतना ही नहीं पीएम मोदी ने कहा कि हमारे स्वतंत्रता आंदोलन के समय कई-कई पीढ़ियों ने अपना सब कुछ समर्पित कर दिया था। गुलामी के कालखंड में कोई ऐसा समय नहीं था जब आजादी के लिए आंदोलन न चला हो, देश का कोई भूभाग ऐसा नहीं था जहां आजादी के लिए बलिदान न दिया गया हो। उन्होंने कहा, ‘बरसों से टाट और टेंट के नीचे रह रहे हमारे रामलला के लिए अब एक भव्य मंदिर का निर्माण होगा। टूटना और फिर उठ खड़ा होना, सदियों से चल रहे इस व्यतिक्रम से रामजन्मभूमि आज मुक्त हो गई है। पूरा देश रोमांचित है, हर मन दीपमय है। सदियों का इंतजार आज समाप्त हो रहा है।’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘राम मंदिर के लिए चले आंदोलन में अर्पण भी था, तर्पण भी था, संघर्ष भी था, संकल्प भी था। जिनके त्याग, बलिदान और संघर्ष से आज ये स्वप्न साकार हो रहा है,  जिनकी तपस्या राममंदिर में नींव की तरह जुड़ी हुई है, मैं उन सबको आज 130 करोड़ देशवासियों की तरफ से नमन करता हूं। भगवान राम की अद्भुत शक्ति देखिए। इमारतें नष्ट कर दी गईं, अस्तित्व मिटाने का प्रयास भी बहुत हुआ, लेकिन राम आज भी हमारे मन में बसे हैं, हमारी संस्कृति का आधार हैं। श्रीराम भारत की मर्यादा हैं, श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं।’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘राम समय, स्थान और परिस्थितियों के हिसाब से बोलते हैं, सोचते हैं, करते हैं। राम हमें समय के साथ बढ़ना सिखाते हैं, चलना सिखाते हैं। राम परिवर्तन के पक्षधर हैं, राम आधुनिकता के पक्षधर हैं। उनकी इन्हीं प्रेरणाओं के साथ, श्रीराम के आदर्शों के साथ भारत आज आगे बढ़ रहा है।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि श्रीराम हमारी आस्था का प्रतीक बनेगा। हमारी राष्ट्रीय भावना का प्रतीक बनेगा और यह मंदिर करोड़ों करोड़ों लोगों की सामूहिक संकल्प शक्ति का भी प्रतीक बनेगा। यह मंदिर आने वाली पीढ़ियों को आस्था श्रद्धा और संकल्प की प्रेरणा देता रहेगा। इस मंदिर के बनने के बाद अयोध्या की सिर्फ भव्यता ही नहीं बढ़ेगी, इस क्षेत्र का पूरा अर्थ तंत्र भी बदल जाएगा। यहां हर क्षेत्र में नए अवसर बनेंगे। हर क्षेत्र में अवसर बढ़ेंगे। सोचिए पूरी दुनिया से लोग यहां आएंगे। पूरी दुनिया प्रभु राम और माता जानकी का दर्शन करने आएगी। राम मंदिर के निर्माण की प्रक्रिया राष्ट्र को जोड़ने का उपक्रम है।

अंत में प्रधानमंत्री ने कहा मर्यादाओं का पालन करते हुए सभी देशवासियों को प्रभु राम और माता जानकी स्वस्थ रखें, सुखी रखे यही प्रार्थना है। सभी देशवासियों पर माता सीता और श्रीराम का आशीर्वाद बना रहे।

और इस तरह अभिजीत मुहूर्त में भूमि पूजन कार्यक्रम संपन्न हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या की माटी को अपने माथे पर लगाया और प्रणाम किया।

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