यूपी में बिजली हुई महंगी, मध्यम और गरीब लोगों पर पड़ेगी महंगाई की मार

लखनऊ, एमएम : बिजली अब आम लोगों के जीवन का हिस्सा हो गया है। बिजली नहीं रहने पर अब लोग पहले की अपेक्षा ज्यादा बैचैन हो जाते हैं। एक तो देश में कोरोना काल चल रहा है। व्यापार और काम धंधे ना के बराबर हो रहे हैं। आलम यह है कि देश की जीडीपी -23 पर पहुंच चुकी है। लोगों की नौकरियां जा रही है। इस बीच उत्तरप्रदेश सरकार ने बिजली के दाम बढाने की घोषणा कर दी है। ऐसे में इसका सबसे ज्यादा मार गरीब और मध्यम तबके के लोगों पर पड़ेगी।

उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने नए स्लैब पर बिजली की नए रेट्स का प्रस्ताव नियामक आयोग भेज दिया है। प्रस्तावित नए रेट्स से कुछ उपभोक्ताओं को लाभ होता दिख रहा है वहीं कुछ को नुकसान होगा। गरीब उपभोक्ताओं की दरों में किसी भी तरह का बदलाव नहीं है। वहीं मध्यम वर्ग के उपभोक्ताओं पर नई दरें अतिरिक्त भार डाल सकती हैं। इसी के साथ बिजली की अधिक खपत करने वाले बड़े उपभोक्ताओं को भी प्रस्तावित नई दरों में राहत दी गई है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों और उद्योगों की बिजली दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। नए स्लैब और रेट्स से घरेलू शहरी और ग्रामीण के वह उपभोक्ता जो 101 से 150 यूनिट की खपत करते हैं उनपर असर पड़ेगा। नियामक आयोग ने पावर कॉरपोरेशन की प्रस्तावित दर को तीन दिन के अंदर समाचार पत्रों में प्रकाशित करने का आदेश दिया है। बिजली के नए रेट्स पर आयोग में 24 और 28 सितंबर को सुनवाई होगी।

घरेलू शहरी उपभोक्ता जो 100 यूनिट से ज्यादा खर्च नहीं करते हैं उनपर इन नई दरों से कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। वहीं जो उपभोक्ता 150 यूनिट तक खर्च करते हैं उन्हें प्रति यूनिट 30 पैसे अधिक देना होगा. ।

यूपी ग्रामीण क्षेत्रों की प्रस्तावित नई बिजली दरें

मध्यम वर्ग के उपभोक्ताओं की संख्या ज्यादा है जो 150 यूनिट या उससे अधिक खर्च करते हैं। वहीं 151 यूनिट से 300 यूनिट तक इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं पर 20 पैसे प्रति यूनिट कम देने होंगे।

इसी के साथ 301 यूनिट से 500 यूनिट खर्च करने वालों तो 15 पैसे प्रति यूनिट अधिक देना होगा। 500 यूनिट से ज्यादा बिजली इस्तेमाल करने वालों को 7 रुपए प्रति यूनिट देना होगा।

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