बिहार में फिर उफनाई नदियां, कोसी-बागमती खतरे के निशान से ऊपर; आपदा विभाग ने जारी किया टॉल फ्री नंबर

पटना, एमएम : बिहार में मानसून आने के बाद से लगातार किसी ना किसी जिला में बारिश हो ही रही है। बिहार में अगले चार दिन के लिए भारी बारिश का अलर्ट है।  बिहार में भारी बारिश के अलर्ट के बीच कई नदियां उफान पर हैं। खासकर उत्‍तर बिहार में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। नेपाल में भी हो रही भारी बारिश ने बॉर्डर एरिया के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बताया जाता है कि नेपाल में बारिश से गंडक नदी का जलस्तर एक लाख क्यूसेक के पार हो गया है। उधर, कोसी-बागमती नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। खगडि़या में तो एक गांव के 15 घर पानी में समा गए। वहीं, मौसम विभाग ने चार दिनों तक भारी बारिश की चेतावनी दी है। इसे देखते हुए बिहार में जल संसाध विभाग ने टॉल फ्री नंबर 18003456145 जारी कर आम लोगों से सूचना शेयर करने को कहा है।

आपदा विभाग के अनुसार, खगडिय़ा में कोसी उफान पर है। बीते कई दिनों से बलतारा में उसका जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। बुधवार को बलतारा में उसका जलस्तर 34.31 मीटर था। यह खतरे के निशान से 46 सेमी अधिक है। इसी तरह, खगडिय़ा में बागमती संतोष स्लूईस के पास खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। सीतामढ़ी में बागमती का जलस्तर अभी कटौंझा में लाल निशान के पार बना हुआ है। सोनाखान एवं बैरगनिया में जलस्तर स्थिर है। शिवहर में बागमती के जलस्तर में उतार-चढ़ाव जारी। बूढ़ी गंडक भी खगडिय़ा के अघोरी स्थान और समस्तीपुर में बढ़ रही है, लेकिन अभी वह वहां खतरे के निशान से काफी नीचे है। गंगा मुंगेर में घट रही है और अभी खतरे के निशान से काफी नीचे है।

वहीं मुजफ्फरपुर में लखनदेई नदी के तटबंध में औराई, विशनपुर समेत कई स्थानों पर रिसाव होने से किसानों में दहशत है। मालूम हो कि लखनदेई का तटबंध गत वर्ष आधा दर्जन जगहों पर टूट गया था, जिससे औराई उत्तरी और पूर्वी क्षेत्र में तबाही मच गई थी। विशनपुर गांव के समीप जिस स्थान पर गत वर्ष सौ मीटर में तटबंध टूट गया था, वहां बोरी में बालू रखने के बाद भी काफी कमजोर हो गया था। उसी जगह पर फिर रिसाव हो रहा है। इस वर्ष तटबंध की मरम्मत नहीं कराई गई है। इस कारण एक बार फिर उक्त स्थान पर पानी का रिसाव आरंभ हो गया है। अगर लखनदेई नदी के जलस्तर में और बढ़ोतरी होती है तो तटबंध फिर से टूटने की प्रबल आशंका बनी हुई है। तटबंध में रिसाव होने से पानी औराई के चौर से निकल कर महेश स्थान चौर में गिरने लगा है। सीओ ज्ञानंद कुमार ने बताया कि बांध की स्थिति से जिला प्रशासन को अवगत कराया जा चुका है। आगे की कार्रवाई जल संसाधन विभाग को करनी है।

बताया जाता है कि नेपाल में बारिश से गंडक नदी का जलस्तर एक लाख क्यूसेक के पार हो गया है। किसी भी स्थिति से निबटने को बगहा में गंडक बराज पर अभियंता कैंप कर रहे हैं। वहीं राहत कि बात है कि दरभंगा से होकर बहने वाली कोसी, कमला-बलान, बागमती और अधवाड़ा समूह की नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे कम हो रहा है। नदियां खतरे के निशान से काफी नीचे है। इसके कारण जिले में अभी बाढ़ का खतरा नहीं है।

खगडिय़ा में तटबंध तोड़ देने के लिए व्याकुल कोसी वीरबास गांव के 15 घरों को निगल गई है। तटबंध पर शरण लेने के लिए बाध्य हुए विस्थापितों की परेशानी लगातार हो रही बारिश ने भी बढ़ा दी है। आठ दिनों से बाढ़ नियंत्रण कार्य भी चल रहा है। कटाव पर बहुत हद तक नियंत्रण हुआ है, लेकिन 15 घर नदी के गर्भ में समा चुके हैं। विस्थापित परिवारों ने  बदला-नगरपाड़ा तटबंध पर शरण ले रखा है। एक तरफ कोसी ने इनके आशियाने छीन लिए हैं तो दूसरी ओर मूसलधार बारिश ने परेशान कर रखा है।

जल संसाधन मंत्री संजय झा ने कहा कि नेपाल स्थित जलग्रहण क्षेत्रों एवं तराई में नौ से 15 जुलाई तक भारी बारिश का पूर्वानुमान है। इसके चलते बिहार में बाढ़ की आशंका गहरा गई है। ऐसे में विभाग ने बाढ़ प्रबंधन से जुडी सामग्री पहले ही संवेदनशील स्थलों पर पहुंचा दिया है, ताकि किसी भी हालात का सामना किया जा सके। संजय ने झा ने ट्वीट करके कहा कि मौसम पूर्वानुमान के अनुसार 17 जुलाई के बाद ही बिहार में बारिश थमने के आसार हैं। मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्वी चंपारण, शिवहर, खगडिया, सुपौल, सीतामढ़ी, समस्तीपुर, मधुबनी, बेगूसराय, सहरसा, मधेपुरा, बांका एवं भागलपुर जिलों में इस दौरान अलग-अलग दिनों में तेज बारिश होने का अनुमान है।

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