दरभंगा के घनश्यामपुर और कुशेश्वरस्थान के दर्जनों गावों में घुसा बाढ़ का पानी, प्रखंड मुख्यालय से टूटा संपर्क

दरभंगा, एमएम : बिहार में मानसून आते ही बाढ़ का खतरा बढ़ जता है। पिछले चार-पांच दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण खेत खलिहान तक में जल जमाव हो गया। इतना ही नहीं नदियों के जलस्तर में भी लगातार वृद्धि हो रही है। खास कर उत्तर बिहार लगभग हरेक साल बाढ़ की चपेट में आ जाता है। दरभंगा जिला में पिछले चार दिन से बारिश हो रही है। नतीजा कमला-बलान नदी का जलस्तर बढ़ने से घनश्यामपुर प्रखंड के कई गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। नदी के दोनों तटबंध के बीच बसे बैद्यनाथपुर, बाउर, नवटोलिया, कनकी मुसहरी, कैथाही, भरसाहा, गिदराही, जमरी डीह मुसहरी, लगमा मुसहरी, गिद्धा, रसियारी पुनर्वास टोला गांव में बाढ़ के पानी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। गांव की सड़कों पर चार से पांच फीट पानी बह रहा है। प्रखंड मुख्यालय से कई गावों का सड़क संपर्क भंग हो गया है। नदी के जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए ग्रामीण ऊंचे स्थानों की ओर पलायन करने लगे हैं।

दूसरी ओर तटबंध पर पानी के दवाब को देखते हुए चैकसी बढ़ा दी गई है। 65वें किलोमीटर, जयदेवपट्टी से 75वें किमी रसियारी के बीच तटबंध मरम्मत कार्य शुरू कर दिया गया है। अंचलाधिकारी दीनानाथ कुमार व थानाध्यक्ष आशुतोष कुमार झा ने तटबंध का निरीक्षण भी  किया। सीओ ने बताया कि क्षेत्र में निजी और सरकारी मिलाकर कुल सात नावों का परिचालन शुरू करवाया गया है। लोग बाढ़ से डरने लगे हैं और ग्रामीणों को बाढ़ के विकराल रूप की आशंका अभी से सताने लगी है।

वहीं जिले के कुशेश्वरस्थान प्रखंड में बाढ़ का कहर बरपने लगा है। अचानक बाढ़ का पानी आने से सैकड़ो एकड़ में लगी धान और मूंग की फसल पूरी तरह डूब गई है। बाढ़ के पानी के कारण यहां के दो दर्जनों गावों का संपर्क प्रखंड मुख्यालय से टूट गया है। दियारा क्षेत्र यानि नदी के पेटी में बसे 50 हजार लोग पूरी तरह बाढ़ से प्रभावित हो गए हैं।

बता दें कि कमाल बलान पश्चिमी एवं पूर्वी तटबंध निर्माण के बाद से इटहर पंचायत का चौकिया, विशुनिया पोखर, लक्ष्मीनियां मुसहरी गांव तटबंध के अंदर बसा है। यहां हर साल सैकड़ों लोगों को बाढ़ की विभीषिका झेलनी पर रही है। जैसे ही कोसी, कमला बलान और करेह नदी का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाके में बाढ़ का पानी घुसा, लोग अभी से ही तटबंध पर अपना आशियाना बनाने के लिए जगह तलाशने में लग गए हैं। नदी में लगातार जलस्तर बढ़ने से चौकिया गांव के दर्जनों दलित परिवारो का घर उजड़ने लगा है। इतना ही नहीं, उसड़ी के कोनिया में भी कोसी नदी में हो रहे कटाव से लोग दहशत में हैं। गांव में लगातार हो रहे कटाव के कारण आधा दर्जन दलित परिवार का घर पानी की तेज धारा के साथ नदी में विलीन हो गया है। चौकिया के लोगों में दहशत है। लोग रतजगा कर रहे हैं।

बाढ़ आने के बाद से यहां के लोगों का जीवन पूरी तरह नाव से होता है। जिनके पास नाव नहीं होती, उनका जीवन कष्टदायक होता है। वे दूसरे की नाव पर ही आश्रित होते हैं। सक्षम लोग स्थानीय बाजार से नाव खरीद ठेला पर उठाकर अपने घर ले जाने लगे हैं। इस बार तटबंध की सुरक्षा को देखते हुए लगभग दो दर्जन से अधिक पुलिस बल की तैनाती तटबंध पर की गई है।

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