उत्तर बिहार में चमकी बुखार का कहर, एसकेएमसीएच में बच्ची समेत दो की मौत

मुजफ्फरपुर, एमएम : उत्तर बिहार के लिए चमकी बुखार अब अभिशाप बन गया है। या यूँ कहें की हरेक साल इस बीमारी से मिथिला प्रक्षेत्र के सैकड़ों नौनिहाल इसकी चपेट में आ जाते हैं और कितनों की तो जान तक चलि जाती है। मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, पूर्वी और पश्चिमी चंपारण, समस्तीपुर, बेगुसराय और शिवहर जिले में इसका ज्यादा प्रभाव देखने को मिलता है। हालांकि साल 2019 में अधिक बच्चों के मौत के बाद राज्य सरकार ने इस साल 100 बेड का पीकू अस्पातल बनाया और इस बीमारी से प्रभावित जिले में लगातार जागरूकता अभियान चला लोगों को सचेत भी कर रही है। फिर भी इस साल बच्चों के मरने का सिलसिला शुरू हो चूका है।

श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज अस्पताल इलाजरत दो बच्चों की मौत हो गई। इनमें से एक एईएस पीडि़त पूर्वी चंपारण के पीपरा सीताकुंड निवासी धर्मेन्द्र साह की तीन वर्षीय पुत्री सृष्टी कुमारी तथा दूसरी तेज बुखार व उल्टी-दस्त से पीडि़त रूपाली शामिल है।

जानकारी के अनुसार सृष्टि को नौ जून की सुबह चमकी बुखार से पीडि़त होने पर पीकू वार्ड में भर्ती कराया गया था। रिपोर्ट आने के बाद बच्ची में एईएस की पुष्टि हुई थी। वहीं सोमवार सुबह करजा थाना के बड़कागाव तुलसी महतो की ढाई साल की बेटी रूपाली कुमारी को दो दिन पूर्व दस्त व चमकी से पीडि़त होने पर पीकू वार्ड में भर्ती कराया गया था। जिले में अबतक तक एईएस पीडि़त बच्चों के मौत की संख्या छह पर पहुंच गई है। हालांकि मौसम में बदलाव के बाद स्थिति में सुधार की उम्मीद की जा रही है।

तेज बुखार से पीडि़त सात बच्चों को भर्ती कराया गया है। इलाजरत बच्चों में सिकंदरपुर के ढाई वर्षीय एंजल कुमारी, पूर्वी चम्पारण के कोटवा के सात वर्षीय अमित कुमार, सुगौली के 11 वर्षीय रंजना कुमारी, मिठनपुरा के 14 माह के आरती कुमारी, सीतामढ़ी पुरनैया के 11 वर्षीय कुंदन कुमार, मीनापुर के सात वर्षीय मो अरमान व अहियापुर के 30 माह के सनी कुमार को भर्ती कराया गया है।

एसकेएमसीएच में जीवन-मौत से जूझ रहे पांच बच्चों ने चमकी से जंग जीत ली। शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. गोपाल शंकर सहनी के मुताबिक बीमारी के बाद समय से इलाज शुरू होने पर बच्चों को बचाया जा सकता है। जो भी बच्चे पीकू वार्ड में आए उनका इलाज प्रोटोकॉल के तहत किया गया।

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