लंदन के दो वैज्ञानिकों का दावा डेक्सामेथासोन नामक दवाई कोरोना मरीज़ों के लिए सिद्ध होगा रामबाण

नई दिल्लीः वैश्विक कोरोना महामारी के गंभीर संकट के बीच एक अच्छी ख़बर सामने आ रही है। लंदन में एक ट्रायल के दौरान खुलासा हुआ है कि कोविड अस्पताल में भर्ती गंभीर मरीजों को जेनरिक स्टेराॅयड डेक्सामेथासोन की खुराक को कम मात्रा में देने से मरीज़ों की मृत्यु दर में एक तिहाई की कर्मी दर्ज की गई है। वैज्ञानिकों को ट्रायल के दौरान मिले परिणाम को बड़ी सफ़लता के तौर पर देखा जा रहा है। यह क्लीनिकल ट्रायल ब्रिटेन के नेतृत्व वाले वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है और इसका नाम रिकवरी दिया गया है। डाॅक्टरों का मानना है कि अस्पतालों को इसे प्राथमिकता से साथ इलाज़ में शामिल करना चाहिए और ज़रूरत के हिसाब से मरीज़ों पर इसका प्रयोग किया जाना चाहिए।
ट्रायल का नेतृत्व कर रहे आॅक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मार्टिन लैंड्रे ने कहा, ‘‘यह एक परिणाम है जो दिखाता है कि अगर कोरोना के ऐसे मरीज जो वेंटिलेटर या ऑक्सीजन पर हैं, उन्हें डेक्सामेथासोन दिया जाता है तो यह मरीज के जीवन को बचा सकता है। यही नहीं, यह सब अपेक्षाकृत कम खर्च में हो सकता है।
प्रोफेसर मार्टिन लैंड्रे के सहयोगी पीटर हॉर्बी के अनुसार, डेक्सामेथासोन, सूजन को कम करने के लिए अन्य बीमारियों में व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला एक सामान्य स्टेरॉयड है। यह ऐसा एकमात्र ड्रग है जिसने अब तक मृत्यु दर को कम किया है। हॉर्बी ने इसे एक बड़ी कामयाबी बताया. ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री मैट हैनकॉक ने मंगलवार को कहा कि ब्रिटेन ने कोरोना वायरस रोगियों को तुरंत डेक्सामेथासोन देना शुरू कर दिया है। आपको बताते चले कि दुनिया के तमाम देश इस वक़्त कोरोना से लड़ने के लिए वैक्सीन की खोज में लगे हुए हैं। कुछ दिन पूर्व भारत में भी प्लाज़मा थैरेपी के बारे में कहा जा रहा था कि गंभीर मरीज़ों को ठीक हुए मरीज़ के शरीर से प्लाज़मा निकालकर देने से उनको फ़यदा होता है।

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