भारत-चीन खूनी संघर्ष में शहीद हुए बिहार के लाल, 20 दिन की बेटी का मुंह तक नहीं देखे पाए शहीद कुंदन ओझा

पटना, एमएम : बिहार हमेशा से ही बलिदानों की धरती रही हैं। देश के लिए बलिदान देने वाले हजारों शहीद इस बिहार की धरती पर पैदा हुए। बिहारियों का बलिदान यूँ ही जाया नहीं जा सकता। सोमवार रात चीनी सेना संग खूनी झड़प में बिहार के एक लाल ने अपने प्राणों की आहुती दे दिया। बिहार के भोजपुर का एक वीर सपूत देश की रक्षा करते चीन के हमले में शहीद हो गया। शहीद जवान मूल रूप से जिले के बिहिया थाना क्षेत्र के पहरपुर गांव के रहने वाले रविशंकर ओझा के 28 वर्षीय पुत्र कुंदन ओझा थे। उनका परिवार करीब तीस साल से झारखंड राज्य के साहेबगज में रह रहा है। वहीं मंगलवार की शाम बेटे की शहादत की खबर मिलते ही गांव का माहौल गमगीन हो उठा। वहीं कुंदन के पैतृक घर में भी कोहराम मच गया। कुंदन अपने पहले बच्चे को देखने से पहले ही शहीद हो गए।

इससे गांव-घर के लोग काफी मर्माहत हैं। बताया जाता है कि किसान रविशंकर ओझा के पुत्र कुंदन ओझा की करीब दस साल पहले नौकरी लगी थी। महज दो साल पहले उनकी शादी हुई थी और मात्र बीस दिन पहले बच्ची हुई थी। घर में पहली बेटी होने को लेकर काफी खुशी थी। जानकारी के अनुसार कुंदन ओझा तीन भाइयों में मांझिल थे। इनमें कमाने वाले सिर्फ कुंदन ही थे। उनके चाचा धर्मनाथ ओझा आरा में वकील हैं। ग्रामीण प्रवीण रंजन ओझा उर्फ पिंटू ओझा बताते हैं इनके परिवार के लोग तीस वर्ष पहले से ही झारखंड राज्य के साहेबगंज जिले के बिहारी ग्राम में रहते है। कुंदन व उनके परिवार के लोग शादी-विवाह सहित अन्य फंक्शन में गांव आते रहते हैं।

परिजनों ने बताया कि शहीद जवान के ससुर दिल्ली में नौकरी में हैं। उनकी सास घर पर रह रही हैं। दामाद के शहीद होने की सूचना मिलते ही ससुराल में कोहराम मच गया। परिवार के चाचा विवेक कुमार दूबे ने बताया कि नेहा तीन बहनें हैं। बड़ी बहन निधि और छोटी निशा है। दो भाई हेमंत और लक्की है। शहीद का पार्थिव शरीर पहुंचने पर सभी सदस्य डिहारी जाएंगे। ससुराल वालों का भी रो रो के बुरा हाल हो रहा है। उनका कहना है कि दामाद एक साल पहले ससुराल आए थे और सभी से मिलनसार थे। भगवान् ने यह अनर्थ किया है।

 

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