कोरोना संकट को अवसर में बदलने की बिहार सरकार ने निकाली राह, औद्योगिक नीति में किया बदलाव

पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर कोरोना संक्रमण से बचाव एवं लॉकडाउन के कारण हुए आर्थिक संकट की स्थिति में लोगों को राहत प्रदान करने के लिए बिहार सरकार हर आवश्यक कदम उठा रही है। सभी श्रमिकों के लिए रोजगार सृजन, आपदा प्रभावित किसानों को आर्थिक मदद, आश्रय विहीन व्यक्तियों के आवास की व्यवस्था, नये राशन कार्ड बनाने एवं जरूरतमंद लोगों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने जैसे पांच महत्वपूर्ण कार्य राज्य सरकार की प्राथमिकता है। सरकार आपदा को अवसर में बदलने की दिशा में काम कर रही है।

इसी कड़ी में राज्य सरकार की ओर से औद्योगिक इकाइयों को प्रोत्साहित करने के लिए बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति- 2016 में संशोधन किया गया है। इस नीति की अवधि को वर्तमान समय से अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ा कर 31 मार्च, 2025 तक कर दिया गया है। नीति के अंतर्गत प्राथमिकता कोटि में कई अतिरिक्त ड्राइ-वेयरहाउस, कोल्ड चेन, खाद्य प्रसंस्करण प्रक्षेत्र, टिशु कल्चर लैब एवं क्रॉप केयर केमिकल इकाइयां, गैर कृषि संयंत्र के लघु यंत्र विनिर्माण क्षेत्र , इलेक्ट्रिक जेनरेटर, ट्रांसफार्मर एवं विद्युत वितरण तथा कंट्रोल उपकरण का निर्माण, इलेक्ट्रिक लाइटिंग उपकरण का निर्माण (सूचना प्रौद्योगिकी, सूचना प्रौद्योगिकी आधारित सेवाएं तथा इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर विनिर्माण प्रक्षेत्र में), फ्लाई ऐश ब्रिक्स, एएसी ब्लॉक, ऑटोमोबाइल, रक्षा उपकरण निर्माण, आभूषण, खेल-कूद सामग्री को समावेशित किया गया है। राज्य के बाहर में अवस्थित उद्योगों का बिहार में स्थानांतरण को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज एक साल के लिए लाया गया है। इस पैकेज के तहत प्लांट और मशीनरी के स्थानांतरण और उनके स्थापना पर हुए व्यय के 80 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति की जायेगी।

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