बिहार चुनाव : महागठबंधन में बढ़ रही बेचैनी, सीट शेयरिंग के मुद्दे पर तेजस्वी खामोश

पटना,एमएम:  बिहार में इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं। लिहाजा हरेक दल में दल बदल जारी है। नेता अपने फायदे के मुताबिक अपनी गोटी सेट करने में लग गए हैं। हालांकि विधानसभा चुनाव की कोई औपचारिक ऐलान अभी नहीं हुआ है। फिर दोनों गठबंधन में सीट को लेकर खींचतान चालू है। सीट को लेकर सबसे ज्यादा माथापच्ची महागठबंधन में देखने को मिल रहा है।

सियासी विश्लेषकों की माने तो महागठबंधन में बेचैनी बढ़ गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव सारा काम कर रहे हैं। राष्‍ट्रीय जनता दल की संगठनात्मक बैठकें, बाढ़ प्रभावित इलाकों के दौरे, आम और खास लोगों से मिलना-जुलना तथा बातें करना सब जारी है। सत्ता पक्ष पर हमले भी बिना ब्रेक कर रहे हैं। सिर्फ सहयोगी दलों से दूरी बना रखी है। महागठबंधन में सीट बंटवारे के मुद्दे पर आपस में बात-मुलाकात करने के लिए उनके पास फुर्सत नहीं है। बिहार की राजनीति में हाल के दिनों में तेजी से बदलते घटनाक्रम और राजद की बेरूखी से घटक दल हैरान-परेशान और बेचैन हैं। जैसे-जैसे चुनाव का समय करीब आते जा रहा है, वैसे-वैसे उनकी उलझन बढ़ती जा रही है।

राजद की बेरूखी से सबसे ज्यादा आघात हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा को लगा है। हम प्रमुख जीतनराम मांझी अब निर्णायक दौर से गुजर रहे हैं। 22 अगस्त से पहले वह कभी भी महागठबंधन में रहने या ना रहने को लेकर आखिरी फैसला ले सकते हैं।

इसके पहले कांग्रेस के बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल बिहार दौरे पर आए थे। उन्हें पटना में तीन दिन रहकर आरजेडी के साथ सीट बंटवारे का मसला सुलझाना था, किंतु अपने ही दल के कुछ वरिष्ठ नेताओं से मिलकर गोहिल भी लौट गए। अन्य किसी दल के नेताओं से उनकी मुलाकात तक नहीं हो सकी।

महागठबंधन में इस बार वामपंथी दलों को भी शामिल होने की बात चली है। यह पहल खुद आरजेडी की ओर से की गई है, लेकिन हकीकत यह है कि अभी तक उसे भी अंजाम तक नहीं पहुंचाया जा सका है। राष्‍ट्रीय लोक समता पार्टी और विकासशील इंसान पार्टी से भी बात किसी स्तर पर शुरू नहीं हो सकी है।

चुनाव का समय नजदीक आ गया है और ऐसी संवादहीनता से महागठबंधन के घटक दलों में बेचैनी साफ-साफ देखी जा रही है। मांझी की बेचैनी छलकती भी रही है, लेकिन अन्य दल के नेता अंदर ही अंदर बेचैन हैं। आरजेडी के माय समीकरण ने उन्हें विवश करके रखा है।

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