विश्वविद्यालय शिक्षकों की नियुक्ति का रास्ता साफ, नियुक्ति परिनियम को राज्यपाल की मुहर

पटना, एमएम : बिहार के विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापकों की बहाली की उलटी गिनती शुरू हो गयी है। एक तरफ जहां रोस्टर के हिसाब से इनके रिक्त पदों की गणना अंतिम चरण में है, वहीं बिहार के राज्यपाल सह कुलाधिपित फागू चौहान ने ‘बिहार के विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक के पदों पर नियुक्ति हेतु परिनियम-2020’ को अपनी स्वीकृति दे दी है। परिनियम पर सरकार के शिक्षा विभाग ने पहले ही सहमित दे दी थी। राज्यपाल सचिवालय ने सोमवार शाम परिनियम को अधिसूचित किया।

परिनियम की खास बात यह है कि अभ्यर्थियों के एकेडमिक स्कोर के लिए 100 जबकि साक्षत्कार के लिए 15 अंक तय किए गए हैं। दोनों में प्राप्तांकों के आधार पर अभ्यर्थियों की मेधा सूची तैयार होगी। आयोग की मेधा सूची जारी होने के एक वर्ष के लिए मान्य होगी।  शैक्षणिक योग्यता पर 100 अंक तय किए गए हैं उनमें 80 अंक डिग्रियों पर, 10 अंक शोध और 10 अंक शिक्षण अनुभव के लिए रखे गए हैं।

राजभवन द्वारा अधिसूचित परिनियम के मुताबिक बिहार के विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक पद पर नियुक्तियां, ‘बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग’ द्वारा की जायेंगी। नियुक्ति अखिल भारतीय स्तर पर विज्ञापन के तहत होगी। सहायक प्राध्यापक पद पर नियुक्ति के लिए अभ्यर्थियों की आयु विज्ञप्ति प्रकाशित होनेवाले वर्ष की पहली जनवरी को अधिकतम 55 वर्ष मान्य होगी। सहायक प्राध्यापक पद का वेतनमान वही होगा, जो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा समय-समय पर अनुशंसित एवं राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत किया जायेगा। नियुक्त अधिकारी विषयवार शिक्षकों के रिक्त पदों के आरक्षण रोस्टरवार शिक्षा विभाग के माध्यम से बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग को नियुक्ति की अधियाचना भेजेगा।

आयोग द्वारा किन विषयों में प्राथमिकता के आधार पर चयन किया जाएगा इस विषय में शिक्षा विभाग अनुशंसा करेगा। नियुक्ति के लिए साक्षात्कार बोर्ड तीन विषय विशेषज्ञ शिक्षकों को मिलाकर बनेगा। ये आयोग अध्यक्ष द्वारा नामित होंगे। आयोग के अध्यक्ष अथवा उनके द्वारा नामित आयोग के सदस्य बोर्ड के अध्यक्ष होंगे।

परिनियम के तहत विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक के पद पर नियुक्ति के लिए अभ्यर्थियों के संक्षिप्तीकरण/चयन हेतु अंकों की वितरण-तालिका को भी स्वीकृति दी गयी है। इसके मुताबिक शैक्षणिक रिकार्ड के लिए स्नातक में 80 फीसदी एवं उससे ऊपर पर 15 अंक, 60 से अधिक तथा 80 से कम के लिए 13 अंक, 60 से कम तथा 55 या उससे अधिक के लिए 10 अंक, 45 से ज्यादा और 55 से कम के लिए 5 अंक, पीजी में 80 एवं उससे अधिक के लिए 25 अंक, 60 या उससे ज्यादा पर 80 से कम पर 23 अंक, 55 से ज्यादा तथा 60 से कम (आरक्षित एवं दिव्यांग की स्थिति में 50 फीसदी) पर 20 अंक तय किया गया है। एमफिल में 60 फीसदी एवं उससे ज्यादा पर 7, 55 फीसदी तथा उससे ज्यादा व 60 से कम पर 5 अंक, पीएचडी पर 30 अंक, जेआरएफ के साथ नेट पर 7 अंक, नेटपर  5 अंक, स्लेट/सेट पर 3, शोध प्रकाशन पर 10 तथा शिक्षण या पोस्ट डाक्टोरल का 10 अंक निर्धारित किया गया है। अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त संस्था अभवा भारत सरकार द्वारा पुरस्कार मिलने पर 3 अंक, उसी तरह राज्य स्तर पर राज्य सरकार द्वारा पुरस्कार दिए जाने की स्थिति में 2 अंक मिलेंगे।

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